केजरीवाल की राह पर हेमंत सोरेन! राजीव रंजन बोले- CM ने जनता के पैसे से किया सरकारी आवास पर खिलवाड़

हेमंत सोरेन के सरकारी आवास पर राजीव रंजन प्रसाद बोले, केजरीवाल की राह पर झारखंड सीएम


पटना, 7 मार्च। जदयू प्रवक्ता राजीव रंजन प्रसाद ने अरविंद केजरीवाल पर निशाना साधते हुए कहा कि उन्होंने राजनीति में आने के समय सादगी और भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई का वादा किया था और एक वैकल्पिक राजनीति का मॉडल पेश करने की बात कही थी, लेकिन दिल्ली की जनता अब इसका परिणाम देख चुकी है।

राजीव रंजन ने आईएएनएस से कहा, "जमीन पर उनकी न तो विश्वसनीयता बची है और न ही भरोसेमंद नेतृत्व दिखाई देता है। इस तरह के बयान देकर वे केवल सुर्खियां बटोर सकते हैं, लेकिन अरविंद केजरीवाल की छवि अब पहले जैसी नहीं रही।"

जदयू प्रवक्ता ने झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पर भी निशाना साधते हुए कहा कि अब वे भी केजरीवाल के रास्ते पर चलते दिखाई दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकारी आवास की सजावट और रखरखाव पर भारी खर्च करना जनभावनाओं के साथ खिलवाड़ है।

उन्होंने कहा कि जनता के पैसे का इस तरह इस्तेमाल करना ठीक नहीं है और आने वाले विधानसभा चुनाव में सोरेन सरकार को इसका खामियाजा भुगतने के लिए तैयार रहना चाहिए।

उन्होंने एसआईआर को लेकर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि अगर किसी व्यक्ति का नाम वैध दस्तावेजों के साथ मतदाता सूची में दर्ज है, तो एसआईआर का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी वैध मतदाता का नाम सूची से हटाया न जाए।

राजीव रंजन ने कहा, "इस प्रक्रिया का मकसद यह भी है कि जिन लोगों के पास सही दस्तावेज नहीं हैं, उनके नाम मतदाता सूची में शामिल न हों। बिहार में एसआईआर पहले ही इस तरह का काम कर चुका है।"

वहीं लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ विपक्ष द्वारा अविश्वास प्रस्ताव लाने की चर्चा पर उन्होंने कहा कि संसद में अराजकता किसी भी हालत में स्वीकार नहीं की जा सकती।

उन्होंने कहा, "लोकसभा के स्पीकर के रूप में ओम बिरला की नैतिक जिम्मेदारी है कि वे संसद की गरिमा बनाए रखें। जो लोग असंतुष्ट हैं, वे ऐसे प्रस्ताव ला सकते हैं, लेकिन संख्या बल को देखते हुए साफ है कि यह प्रस्ताव पूरी तरह खारिज हो जाएगा।"

इसके साथ ही उन्होंने नेपाल में हुए चुनाव को लेकर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि जिसे भी जनादेश मिलता है, उसका सम्मान किया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा, "नेपाल हमारा पड़ोसी देश है और भारत-नेपाल के रिश्ते सदियों पुराने हैं। जब वहां नई सरकार बनेगी, तब भारत सरकार कूटनीतिक संबंधों को लेकर सबसे बेहतर फैसले लेगी और सही रणनीति के साथ आगे बढ़ेगी।"
 

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