गुजरात की '181 अभयम' हेल्पलाइन ने 12 साल में 18 लाख से अधिक महिलाओं को बनाया मजबूत, दिया सुरक्षा और सम्मान

गुजरात की '181 अभयम' महिला हेल्पलाइन के 12 साल पूरे, 18 लाख से अधिक महिलाओं को मिला सहारा


गांधीनगर, 7 मार्च। गुजरात की '181 अभयम' महिला हेल्पलाइन ने अपने 12 साल पूरे कर लिए हैं। इस दौरान यह सेवा राज्यभर की महिलाओं के लिए मदद और सुरक्षा का मजबूत जरिया बनकर सामने आई है।

घरेलू हिंसा, उत्पीड़न, साइबर अपराध और वैवाहिक विवाद जैसी समस्याओं का सामना कर रही हजारों महिलाओं को इस हेल्पलाइन ने समय पर सहायता और संरक्षण दिया है।

8 मार्च 2015 को शुरू की गई इस हेल्पलाइन ने पिछले 12 वर्षों में लाखों महिलाओं तक पहुंच बनाई है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, इस अवधि में 18,10,913 से अधिक महिलाओं को मार्गदर्शन, सलाह और सहयोग प्रदान किया गया।

गंभीर और जोखिम भरी परिस्थितियों में हेल्पलाइन की टीमों ने 1,09,886 महिलाओं को बचाया और उन्हें सुरक्षित शेल्टर होम तक पहुंचाया। इसके अलावा 2,29,660 मामलों का समाधान मौके पर ही काउंसलिंग के जरिए किया गया।

अधिकारियों ने बताया कि '181 अभयम' हेल्पलाइन गुजरात की महिलाओं के लिए एक मजबूत सुरक्षा कवच बन गई है। हमारी टीमों ने 3,60,964 मामलों में मौके पर पहुंचकर हस्तक्षेप किया और संकट में फंसी महिलाओं को तुरंत मदद उपलब्ध कराई।

यह हेल्पलाइन 24 घंटे और सातों दिन सक्रिय रहती है। इसमें महिला पुलिस कांस्टेबल और प्रशिक्षित काउंसलर मिलकर काम करते हैं, ताकि पीड़ित महिलाओं को तुरंत सहायता मिल सके।

राज्य सरकार ने इस सेवा को और प्रभावी बनाने के लिए 59 आधुनिक रेस्क्यू वैन तैनात की हैं। इन वाहनों में जीपीएस ट्रैकिंग सिस्टम लगा है और इन्हें मोबाइल सेफ्टी सेंटर के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। इसे देश में एक अभिनव पहल माना जाता है।

तकनीक के इस्तेमाल से भी इस हेल्पलाइन की कार्यक्षमता बढ़ी है। 181 मोबाइल ऐप में 'पैनिक बटन' और 'फोन शेकिंग' जैसे फीचर दिए गए हैं। इनके जरिए महिलाएं बिना कॉल किए ही अपनी सटीक लोकेशन हेल्पलाइन तक भेज सकती हैं।

अधिकारियों ने बताया कि तकनीक और प्रशिक्षित कर्मियों का यह संयोजन सुनिश्चित करता है कि महिलाएं आपात या जानलेवा परिस्थितियों में भी तुरंत मदद प्राप्त कर सकें।

हेल्पलाइन के माध्यम से महिलाओं को कानूनी अधिकारों, सरकारी योजनाओं और अन्य सहायता सेवाओं की जानकारी भी दी जाती है। साथ ही मदद मांगने वाली महिलाओं की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाती है। गुजरात में रहने वाली अन्य राज्यों की महिलाएं भी इस सेवा का मुफ्त लाभ उठा सकती हैं।

मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल और उपमुख्यमंत्री हर्ष सांघवी के नेतृत्व में राज्य सरकार ने इस हेल्पलाइन को महिलाओं की सुरक्षा का एक अहम स्तंभ बनाए रखा है, ताकि राज्य की हर महिला खुद को सुरक्षित और समर्थ महसूस कर सके।
 

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