ट्रैफिक समस्या पर गुजरात का वार! हाई-टेक कैमरों से चप्पे-चप्पे पर नजर, नियमों का उल्लंघन अब मुश्किल

गुजरात: अत्याधुनिक टेक्नोलॉजी से राज्य में ट्रैफिक अनुशासन सुनिश्चित कर रही सरकार


अहमदाबाद, 6 मार्च। बड़े शहरों में ट्रैफिक की समस्या विकराल होती जा रही है, क्योंकि हर कोई जल्दी में होता है और ट्रैफिक नियमों को तोड़कर आगे निकलने की कोशिश करता है। गुजरात सरकार ने इस समस्या से निपटने के लिए अत्याधुनिक टेक्नोलॉजी का सहारा लिया है।

इसके लिए राज्य पुलिस की ओर से सेफ गुजरात कैंपेन के तहत शहरों में बेहद व्यस्त चौराहों और सड़कों पर बड़ी तादाद में सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं। इन सीसीटीवी पर नजर रखने के लिए ट्रैफिक मॉनिटरिंग सेंटर भी बनाए गए हैं। ट्रैफिक मूवमेंट मॉनिटरिंग और चालान भरने की प्रक्रिया के डिजिटलीकरण से जहां ट्रैफिक को नियंत्रित करने में मदद मिल रही है, वहीं ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन करने वालों की आदत भी सुधर रही है।

अहमदाबाद के रहने वाले रवींद्र पटेल ने बताया कि मैं बोपल में रहता हूं। घर से दुकान जाने के लिए निकला था, लेकिन गलती से हेलमेट घर पर ही रह गया इसके बाद यातायात पुलिस ने मेरा ई-चालान काट दिया। ई-चालान भरने के लिए मैं साइबर कंट्रोल रूम आया था, जहां मैंने अपना ई-चालान तुरंत दिया।

अहमदाबाद के ही रहने वाले व्योमेश बाबूलाल ने बताया कि सरकार ने जो नियम बनाए हैं, वे हमारी भलाई और सुरक्षा के लिए हैं। मुझे भी ई-मेमो मिला था और मैंने उसे भर दिया है। नोटिस मेरे घर पर आया था, लेकिन मैंने खुद ऑफिस आकर दो मिनट में चालान भर दिया। इस घटना से मुझे सबक मिला है और अब मैं आगे से ऐसी गलती नहीं करूंगा।

बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के डिजिटल इंडिया के विजन के तहत मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व में गुजरात में ‘परिवहन पोर्टल’ और ‘ई-चालान सिस्टम’ से ट्रैफिक नियमों का सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जा रहा है। इसी वजह से राज्य में ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन करने वालों से वर्ष 2023 में कुल 153 करोड़ 78 लाख रुपए, वर्ष 2024 में 195 करोड़ 87 लाख रुपए, जबकि वर्ष 2025 में करीब 231 करोड़ रुपए के राजस्व प्राप्ति हुए।

तीन वर्षों में 581 करोड़ रुपए से ज्यादा का फाइन वसूला गया है। इस दौरान वाहन चालकों के लगभग 1 करोड़ 45 लाख चालान काटे गए। आंकड़ों के मुताबिक, 2025 में ही अकेले 85 लाख 71 हजार से ज्यादा चालान काटे गए, जिनमें से 76 लाख 46 हजार चालान ऑनलाइन भेजे गए। इस दौरान अकेले अहमदाबाद में 40 लाख 20 हजार चालान काटे गए।

अहमदाबाद के ट्रैफिक डीसीपी नरेश कंजारिया ने बताया कि अहमदाबाद शहर में खासकर पूरे शहर में डिजिटलीकरण की काफी आवश्यकता थी और इससे बड़ी सफलता भी मिल रही है। इसके चलते विशेष रूप से कंट्रोल रूम के माध्यम से ई-मॉनिटरिंग जारी किए जा रहे हैं, जिससे जो वाहन चालक ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन करते हैं, उनके खिलाफ तत्काल कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने बताया कि सीसीटीवी कैमरों के उपयोग से अब पुलिस को जानलेवा दुर्घटनाओं और बड़ी आपराधिक घटनाओं पर नजर रखने में भी मदद मिलती है। डिजिटलीकरण के कारण निगरानी व्यवस्था काफी मजबूत हुई है और इससे कानून व्यवस्था बनाए रखने में भी बड़ा लाभ मिला है।

उन्होंने बताया कि वाहन चालकों को मुख्य रूप से बिना हेलमेट के टू-व्हीलर चलाने, रॉन्ग साइड ड्राइविंग करने और गलत पार्किंग के मामलों में चालान भेजे गए हैं। ट्रैफिक पुलिस के मुताबिक, सुरक्षित गुजरात अभियान का मकसद राजस्व की बढ़ोतरी नहीं है, बल्कि सड़क सुरक्षा और नागरिकों की जान बचाना है, क्योंकि सीसीटीवी के जरिए पुलिस को यह भी पता चलता है कि कहां दुर्घटना हुई है, जिससे पीड़ित को तत्काल मदद मुहैया कराने में मदद मिलती है।

गुजरात सरकार की स्मार्ट ट्रैफिक मैनेजमेंट प्रोसेस और ऑनलाइन चालन प्रक्रिया जहां वाहन चालकों को ट्रैफिक नियमों के पालन के प्रति जागरूक बना रही है, वहीं राज्य में एक अनुशासित यातायात व्यवस्था बनाने में भी कारगर साबित हो रही है।
 

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