नई दिल्ली, 6 मार्च। कच्चे तेल की ऊंची कीमतों से भारत में कंपनियों के मुनाफे पर असर हो सकता है, क्योंकि इससे कई सेक्टर्स में इनपुट लागत बढ़ जाएगी। यह जानकारी एक रिपोर्ट में दी गई।
कोटक इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज की रिपोर्ट में कहा गया कि अगर इजरायल-ईरान युद्ध कुछ हफ्तों से ज्यादा समय तक चलता है तो भारत में कॉरपोरेट कंपनियों की आय में गिरावट आ सकती है, क्योंकि कच्चे तेल की ऊंची कीमतों से सभी सेक्टर की इनपुट लागत बढ़ेगी।
रिपोर्ट में बताया गया कि ऊंची कच्चे तेल और गैस की कीमतों से अर्थव्यवस्था और बाजारों को भी खतरा है, क्योंकि इससे देश का चालू खाता घाटा बढ़ने की संभावना है।
ब्रोकरेज फर्म ने कहा कि मध्य पूर्व में तनाव से निवेशकों (विशेषकर विदेशी निवेशकों) का सेंटीमेंट प्रभावित होने शुरू हो गया है।
विदेशी निवेशकों ने गुरुवार को भारतीय शेयर बाजार में 3,752.52 करोड़ रुपए की बिकवाली की थी। हालांकि, घरेलू निवेशकों का बाजार को सपोर्ट बना हुआ है और इस दौरान उन्होंने 5,153.37 करोड़ रुपए का निवेश इक्विटी में किया।
रिपोर्ट में बताया गया कि भारत, जो अपनी कच्चे तेल की जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा आयात करता है, वैश्विक ऊर्जा कीमतों में तीव्र वृद्धि के प्रति विशेष रूप से संवेदनशील है, जिससे तेल संकट मौजूदा परिवेश में देश के लिए सबसे बड़े व्यापक आर्थिक जोखिमों में से एक बन गया है।
ब्रोकरेज फर्म ने अपनी रिपोर्ट में यह भी कहा कि स्थिर स्थानीय इक्विटी निवेश और भारत की मध्यम अवधि की विकास संभावनाओं जैसे घरेलू कारक बाजारों को समर्थन देना जारी रख सकते हैं, हालांकि निकट भविष्य में भू-राजनीतिक घटनाक्रम एक महत्वपूर्ण निगरानी का विषय बने रहेंगे।
रिपोर्ट में आगे कहा गया है, " मौजूदा समय में बाजार के लिए प्रमुख नकारात्मक जोखिम मध्य पूर्व में तेल/गैस आपूर्ति में व्यवधान और कीमतों में वृद्धि के साथ मध्य पूर्व संकट का अपेक्षा से अधिक लंबा चलना है।"