नई दिल्ली, 6 मार्च। देश के कई हिस्सों में ऐसी पहाड़ियां मौजूद हैं, जो अपनी शांति और प्राकृतिक मनमोहक दृश्यों के लिए जानी जाती हैं।
राजस्थान से लेकर मध्य प्रदेश में आपको अलग-अलग हिल्स देखने को मिल जाएंगी, लेकिन उड़ीसा में एक स्थान है, जहां मौसम, प्रकृति और आस्था तीनों का अनूठा संगम देखने को मिलता है। अगर आप ऐसी जगह जाने का प्लान कर रहे हैं, जहां प्रकृति और भक्ति एक साथ मिले, तो बालाकुमारी हिल्स से बेहतर कोई दूसरी जगह नहीं हो सकती।
उड़ीसा में कई आध्यात्मिक और प्राकृतिक स्थल हैं, लेकिन बालाकुमारी हिल्स सबसे बेहतरीन जगहों में एक है। जहां तक नजर घुमाओ, वहां ऊंचे पहाड़, शांत जंगल और झरनों की आवाज मन को मोह लेती है। खास बात यह है कि बालाकुमारी हिल्स का मौसम ज्यादातर समय सुहावना ही रहता है, और अगर आप ट्रेकिंग के शौकीन हैं, तब भी यह प्लेस शानदार है क्योंकि पहाड़ों पर 1240 सीढ़ियों को चढ़ने के बाद पहाड़ी के शिखर पर पहुंचकर मां बालाकुमारी के दर्शन करने का मौका मिलता है।
पहाड़ की चोटी पर स्थापित मंदिर में मां दुर्गा के बाल रूप की पूजा होती है, और इस मंदिर की स्थापना चिकिटी शाही परिवार ने की थी। अगर 1240 सीढ़ियां बहुत ज्यादा लगती है, तो शिखर पर पहुंचने के लिए एक सड़क का निर्माण भी किया गया है, जहां पर्यटकों की सुगम यात्रा के लिए जिप्सी उपलब्ध रहती है। मौसम सुहाना होने की वजह से साल के लगभग सभी महीनों में यहां पर्यटकों की भारी भीड़ देखने को मिल जाती है, लेकिन नवरात्रि और महाशिवरात्रि के मौके पर रूट पर पर्यटकों की संख्या बढ़ जाती है।
बालाकुमारी हिल्स पर मां भवानी के अलावा, बड़ी पत्थर की शिला भी मौजूद है, जिसे भगवान शिव का विशाल शिवलिंग माना जाता है। शिला काली है और शिला पर त्रिपुंड भी बना है। भगवान शिव का इतना बड़ा शिवलिंग पर्यटकों को सबसे ज्यादा आकर्षित करता है। अब सवाल है कि इतनी खूबसूरत जगह पर कैसे पहुंचे? बालाकुमारी हिल्स पहुंचने के लिए कई रास्ते हैं।
ब्रह्मपुर शहर से हिल्स की दूरी 37 किलोमीटर है और वहां तक पहुंचने के लिए आराम से वाहन मिल जाते हैं। अगर भुवनेश्वर की तरफ से आ रहे हैं तो इसके लिए हिल्स तक पहुंचने की दूरी 202 किमी है। हिल्स तक पहुंचने के लिए भुवनेश्वर रेलवे स्टेशन से सुगम सड़क का निर्माण किया गया है।