कांग्रेस ने हिंद महासागर में ईरानी फ्रिगेट पर अमेरिकी हमले को बताया क्षेत्रीय सुरक्षा का खतरा, भारत के विशेष मेहमानों पर हमला

कांग्रेस ने हिंद महासागर में ईरानी फ्रिगेट पर अमेरिकी हमले पर गहरी चिंता जताई


नई दिल्ली, 5 मार्च। इंडियन नेशनल कांग्रेस (आईएनसी) ने हिंद महासागर में ईरानी नौसेना के फ्रिगेट आईआरआईएस डेना पर अमेरिकी पनडुब्बी द्वारा किए गए हमले पर गहरी चिंता जताई है। इस हमले में कम से कम 87 ईरानी नाविकों की मौत हो गई, जबकि कई अभी भी लापता हैं।

कांग्रेस ने इसे क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बताया है, जो भारत के दरवाजे तक पहुंच चुका है। कांग्रेस के बयान में कहा गया है कि आईआरआईएस डेना 25 फरवरी 2026 तक भारत में इंटरनेशनल फ्लीट रिव्यू और एमआईएलएएन 2026 एक्सरसाइज में हिस्सा ले चुका था। यह जहाज और उसके नाविक भारत के विशेष मेहमान थे। तय प्रोटोकॉल के अनुसार, हमले के समय यह बिना पर्याप्त सुरक्षा के था।

यूनाइटेड नेशंस कन्वेंशन ऑन द लॉ ऑफ द सी (यूएनसीएलओएस) के आर्टिकल 95 और 96 के तहत, जिसे भारत ने भी मंजूरी दी है, खुले समुद्र में इस जहाज को संप्रभु प्रतिरक्षा (सॉवरेन इम्यूनिटी) प्राप्त थी। यह किसी सक्रिय दुश्मनी वाले क्षेत्र से दूर था। इसलिए, यह हमला संयुक्त राष्ट्र चार्टर के आर्टिकल 51 के सेल्फ-डिफेंस मानदंडों को पूरा नहीं करता, जिसमें अनुपातिकता (प्रोपोर्शनैलिटी), आवश्यकता और स्पष्ट जिम्मेदारी जरूरी है।

बयान में कहा गया कि भारत हमेशा से इंडियन ओशन रीजन (आईओआर) में नेट सिक्योरिटी प्रोवाइडर रहा है। भारतीय नौसेना ने 2008 से अदन की खाड़ी और अरब सागर में एंटी-पायरेसी पेट्रोलिंग में 100 से अधिक युद्धपोत तैनात किए और 3,400 से ज्यादा व्यापारी जहाजों को एस्कॉर्ट किया।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत को आईओआर में 'फर्स्ट रिस्पॉन्डर' और पसंदीदा सिक्योरिटी पार्टनर माना जाता है। ह्यूमैनिटेरियन असिस्टेंस एंड डिजास्टर रिलीफ (एचएडीआर) में भी भारत का रिकॉर्ड शानदार है—2004 की सुनामी, म्यांमार में ऑपरेशन ब्रह्मा, श्रीलंका में ऑपरेशन सागर बंधु आदि ने भारत की समुद्री लीडरशिप को मजबूत किया।

कांग्रेस ने भाजपा सरकार की चुप्पी पर सवाल उठाए। इसे भारत की नौसैनिक जिम्मेदारियों से मुंह मोड़ना बताया और कहा कि यह चुप्पी भारत के ऑपरेशनल फुटप्रिंट को सीमित करती है और विदेशी दखल को हमारे स्ट्रेटेजिक बैकयार्ड में मान्यता देती है, जिससे भारत के जायज हित कमजोर होते हैं। सरकार की इस चुप्पी से भारत की नौसैनिक क्षमताओं और ट्रैक रिकॉर्ड पर बने भरोसे को खतरा है। भविष्य में भारत की अगुवाई वाली एक्सरसाइज, इंटेलिजेंस शेयरिंग, एंटी-पायरेसी और एचएडीआर ऑपरेशंस में सहयोग प्रभावित हो सकता है।

कांग्रेस ने कहा कि भारत का ऑपरेशनल फुटप्रिंट और अंतरराष्ट्रीय कानून के प्रति प्रतिबद्धता 12 नॉटिकल मील के तटीय क्षेत्र या ईईजेड पर नहीं रुकती। भारत को हिंद महासागर में अपने हितों पर मजबूती से जोर देना चाहिए और मुश्किल से हासिल की गई स्थिति को दूसरों के हाथों में नहीं जाने देना चाहिए।
 

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