वाशिंगटन, 3 मार्च। ईरान के खिलाफ मिलिट्री हमले का फैसला लेने से पहले, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप कम से कम 74 बार यही मैसेज दे चुके थे: तेहरान के पास न्यूक्लियर वेपन नहीं हो सकता।
व्हाइट हाउस ने सोमवार को कहा कि ट्रंप कई दशकों से इस मुद्दे पर बिल्कुल साफ और एक जैसी बात कहते रहे हैं कि ईरान को कभी भी परमाणु हथियार हासिल नहीं करने दिए जाएंगे। व्हाइट हाउस ने उनके पिछले 15 वर्षों के बयानों का एक संकलन भी जारी किया, जिसकी शुरुआत नवंबर 2011 से होती है।
उनके शब्द भले थोड़ा बदलते रहे हों, लेकिन उनका जोर कभी नहीं बदला।
24 फरवरी 2026 को ट्रंप ने कहा कि ‘मिडनाइट हैमर’ के बाद ईरान को चेतावनी दी गई थी कि वह अपने हथियार कार्यक्रम, खासकर परमाणु हथियार, दोबारा शुरू न करे। लेकिन इसके बावजूद वे फिर से कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि एक बात पक्की है: मैं दुनिया के नंबर एक टेरर स्पॉन्सर को, जो वे अब तक हैं, न्यूक्लियर वेपन रखने की इजाज़त कभी नहीं दूंगा।”
इससे पांच दिन पहले, 19 फरवरी 2026 को, उन्होंने कहा था कि ईरान परमाणु हथियार नहीं रख सकता। अगर उसके पास परमाणु हथियार हुआ तो मध्य पूर्व में शांति संभव नहीं होगी।
13 फरवरी 2026 को उन्होंने साफ कहा कि वे यूरेनियम संवर्धन भी नहीं चाहते। उनके शब्द थे—हमें किसी तरह का संवर्धन नहीं चाहिए।
कई बार उनके बयान बहुत छोटे और सीधे होते थे।
9 फरवरी 2026 को उन्होंने कहा—कोई परमाणु हथियार नहीं।
6 फरवरी, 2026 को: “एक बात, और एकदम साफ- कोई न्यूक्लियर हथियार नहीं।”
29 जनवरी, 2026 को: “नंबर एक, कोई न्यूक्लियर नहीं।”
25 जून 2025 को उन्होंने कहा कि वे पिछले 15 साल से यही कह रहे हैं कि ईरान परमाणु हथियार नहीं रख सकता, और यह बात उन्होंने राजनीति में आने से पहले भी कही थी।
यह संदेश उनके राष्ट्रपति बनने से पहले का है।
3 नवंबर, 2024 को उन्होंने चेतावनी दी: “ईरान के पास न्यूक्लियर वेपन नहीं हो सकता। न्यूक्लियर वेपन हमारे देश के लिए ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के लिए सबसे बड़ा खतरा हैं।”
7 अक्टूबर, 2024 को उन्होंने कहा: “मैं बस एक ही चीज चाहता था। आपके पास न्यूक्लियर वेपन नहीं हो सकता। आप उन्हें न्यूक्लियर वेपन नहीं रखने दे सकते।”
27 अगस्त 2024 को उन्होंने चेतावनी दी कि अगर ईरान के पास परमाणु हथियार आया तो इजराइल को बड़ा नुकसान हो सकता है।
और पहले, 6 जनवरी, 2020 को ट्रंप ने बड़े अक्षरों में ऐलान किया: “ईरान के पास कभी न्यूक्लियर वेपन नहीं होगा!”
22 जून, 2019 को उन्होंने कहा: “ईरान के पास न्यूक्लियर वेपन नहीं हो सकते!”
और 4 नवंबर, 2011 को, व्हाइट हाउस में आने से कई साल पहले, उन्होंने कहा: “हम ईरान को न्यूक्लियर पावर बनने की इजाजत नहीं दे सकते।”
रैलियों, साक्षात्कारों और सरकारी बयानों में शब्द बदलते रहे, लेकिन उनकी मुख्य मांग नहीं बदली। व्हाइट हाउस का कहना है कि यह रुख लंबे समय से चली आ रही अमेरिकी नीति का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य ईरान को परमाणु बम हासिल करने से रोकना है।
पिछले एक दशक से अधिक समय से ईरान का परमाणु कार्यक्रम पश्चिम एशिया में अमेरिकी नीति का केंद्र बना हुआ है। यूरेनियम संवर्धन, आर्थिक प्रतिबंधों और अंतरराष्ट्रीय जांच को लेकर दोनों देशों के बीच कई बार तनाव और टकराव की स्थिति बनी है।