गजेंद्र चौहान की मिडिल ईस्ट चिंता: 'युद्ध का सीधा असर फिल्म इंडस्ट्री पर, बॉलीवुड भी नहीं बचेगा'

'युधिष्ठिर' गजेंद्र चौहान ने पश्चिम एशिया के तनाव पर जताई चिंता, कहा– 'युद्ध का सीधा असर फिल्म इंडस्ट्री पर पड़ता है'


मुंबई, 2 मार्च। ईरान, इजरायल और अमेरिका जैसे देशों के बीच चल रहे तनाव को लेकर भारतीय मनोरंजन जगत की ओर से प्रतिक्रियाएं सामने आने लगी हैं। इसी बीच, वरिष्ठ अभिनेता गजेंद्र चौहान ने आईएएनएस से बात करते हुए मौजूदा अंतरराष्ट्रीय हालात पर खुलकर अपनी राय रखी। दूरदर्शन के चर्चित धारावाहिक 'महाभारत' में युधिष्ठिर की भूमिका निभाकर घर-घर में पहचान बनाने वाले गजेंद्र चौहान ने कहा कि किसी भी तरह का युद्ध पूरी दुनिया को प्रभावित करता है और फिल्म इंडस्ट्री भी इससे अछूती नहीं रह सकती।

आईएएनएस संग बातचीत में गजेंद्र चौहान ने कहा, ''युद्ध हमेशा विनाशकारी होता है। इसका असर सिर्फ उन देशों तक सीमित नहीं रहता जो सीधे तौर पर इसमें शामिल होते हैं, बल्कि आसपास के क्षेत्रों और व्यापारिक साझेदार देशों पर भी पड़ता है।''

गजेंद्र ने संयुक्त अरब अमीरात जैसे देशों का जिक्र करते हुए कहा, ''बॉलीवुड के कई कलाकार, गायक और प्रोडक्शन हाउस अक्सर मध्य पूर्व में शूटिंग, स्टेज शो और कॉन्सर्ट के लिए जाते हैं। ऐसे में जब वहां सैन्य तनाव बढ़ता है, हमले होते हैं या क्षेत्र में अस्थिरता फैलती है, तो सबसे पहले मनोरंजन से जुड़े कार्यक्रम रद्द होते हैं या टल जाते हैं। इससे कलाकारों और तकनीकी टीमों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है।''

उन्होंने आगे कहा, ''युद्ध का सीधा असर अर्थव्यवस्था पर पड़ता है। जैसे ही तनाव बढ़ता है, तेल की कीमतें ऊपर चली जाती हैं, जिससे महंगाई बढ़ती है। फिल्म निर्माण एक महंगा काम है, जिसमें यात्रा, उपकरण, लोकेशन और बड़ी टीम की जरूरत होती है। जब ईंधन महंगा होता है तो परिवहन खर्च बढ़ जाता है। इससे फिल्म की कुल लागत में इजाफा होता है। अगर आपात स्थिति पैदा हो जाए तो सिनेमाघर भी अस्थायी रूप से बंद हो सकते हैं। टिकट की कीमतें बढ़ सकती हैं और विदेशों में होने वाले शो रद्द हो सकते हैं। बड़े सितारे शायद इस आर्थिक झटके को झेल लें, लेकिन छोटे कलाकारों, तकनीशियनों और दैनिक मजदूरी करने वाले कर्मियों पर इसका सबसे ज्यादा असर पड़ता है।''

गजेंद्र चौहान ने कहा, ''शांति का माहौल रचनात्मकता को जन्म देता है। जब समाज सुरक्षित और स्थिर होता है, तभी कला और संस्कृति फलती-फूलती है। लेकिन युद्ध की स्थिति में लोगों के मन में डर और असुरक्षा का भाव आ जाता है, जिससे रचनात्मक कार्यों पर असर पड़ता है। मध्य पूर्व में तनाव के कारण उड़ानों के रद्द होने की खबरें सामने आ रही हैं। इससे सिर्फ विमानन क्षेत्र ही नहीं, बल्कि लगातार यात्रा करने वाले कलाकारों और फिल्म यूनिट्स को भी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। देरी, रद्द कार्यक्रम और अनिश्चितता से मानसिक दबाव भी बढ़ता है।''

हॉलीवुड और बॉलीवुड के बीच सहयोग, विदेशी लोकेशन पर शूटिंग और अंतरराष्ट्रीय प्रोजेक्ट्स को लेकर उन्होंने कहा, ''आर्थिक और राजनीतिक स्थिरता आपस में जुड़ी होती है। अगर वैश्विक स्तर पर आर्थिक झटका लगता है तो उसका असर रचनात्मक उद्योगों पर भी पड़ता है। फिल्म इंडस्ट्री पहले भी कई कठिन दौर से गुजर चुकी है, चाहे वह आर्थिक मंदी हो या महामारी। हर बार इंडस्ट्री ने खुद को नए तरीकों से ढाला है। ओटीटी प्लेटफॉर्म, छोटे बजट की स्थानीय फिल्में और नई रचनात्मक सोच आगे का रास्ता दिखा सकती हैं। यह उद्योग अपनी मजबूती और रचनात्मकता के दम पर हर संकट से बाहर निकलने की क्षमता रखता है।''
 

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