खाड़ी तनाव: कुमारस्वामी का भरोसा, पीएम मोदी ने पहले भी सुरक्षित निकाले हैं भारतीय, इस बार भी वापसी तय

खाड़ी तनाव पर कुमारस्वामी ने कहा, 'पीएम मोदी पहले भी ऐसे संकटों से निपट चुके हैं'


मैसूर, 2 मार्च। केंद्रीय भारी उद्योग और इस्पात मंत्री एचडी कुमारस्वामी ने सोमवार को कहा कि खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते तनाव के बीच वहां फंसे कन्नड़ लोगों की सुरक्षित वापसी के लिए केंद्र सरकार ने सभी जरूरी कदम उठाए हैं।

मैसूर में मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार पहले भी कई संकटों के दौरान विदेशों में फंसे भारतीयों को सुरक्षित वापस ला चुकी है। इस बार भी सभी को सुरक्षित लाने की हर संभव कोशिश की जा रही है और इस संबंध में कार्रवाई शुरू हो चुकी है।

कुमारस्वामी ने बताया कि उन्होंने दुबई समेत कई जगहों पर फंसे कन्नड़ लोगों से खुद बात की है। उनके अनुसार सभी लोग सुरक्षित हैं और जल्द ही बिना किसी नुकसान के वापस लौटेंगे। उन्होंने लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने और घबराने से बचने की अपील की।

कुमारस्वामी ने कर्नाटक सरकार से गेज्जलगेरे, गोरवनहल्ली, चमनहल्ली और सोमनहल्ली गांवों को मद्दुर टाउन म्युनिसिपल काउंसिल में शामिल करने के फैसले को तुरंत वापस लेने की मांग की। उन्होंने कहा कि यह फैसला स्थानीय लोगों की इच्छा के खिलाफ लिया गया है।

मुख्यमंत्री सिद्धारमैया को लिखे पत्र में उन्होंने कहा कि इन ग्राम पंचायतों को मद्दुर टाउन म्युनिसिपल काउंसिल में मिलाने का निर्णय कैबिनेट बैठक में लोगों की राय पर ठीक से विचार किए बिना लिया गया है। उन्होंने राज्य सरकार से लोगों की भावनाओं का सम्मान करने और इस फैसले पर पुनर्विचार करने की अपील की।

पत्र में कुमारस्वामी ने कहा कि गांव के लोगों, पंचायत सदस्यों और किसान नेता सुनंदा जयराम सहित कई लोगों ने इस फैसले के खिलाफ उन्हें ज्ञापन सौंपा है। उन्होंने बताया कि ग्रामीण पिछले 70 दिनों से अनिश्चितकालीन विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। कुमारस्वामी ने कहा कि वे खुद प्रदर्शन स्थल पर गए थे और वहां लोगों की समस्याएं सुनीं। उन्होंने यह भी बताया कि सुनंदा जयराम द्वारा दिया गया ज्ञापन की एक प्रति उन्होंने अपने पत्र के साथ संलग्न की है।

उन्होंने जोर देकर कहा कि किसी भी स्थिति में इन गांवों को मद्दुर टाउन म्युनिसिपल काउंसिल की सीमा में शामिल नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने बताया कि ग्रामीणों ने एकमत से इस फैसले को तुरंत वापस लेने की मांग की है और इसे जनविरोधी निर्णय बताया है। उनके अनुसार, सरकार को स्थानीय लोगों की इच्छाओं का सम्मान करना चाहिए।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि ये सभी गांव मुख्य रूप से खेती पर निर्भर हैं और यहां 2,000 एकड़ से अधिक सिंचित जमीन है। किसान बड़े पैमाने पर धान, गन्ना, फूल, सब्जियां और अन्य फसलें उगाते हैं। कई परिवार डेयरी और पशुपालन का काम भी करते हैं। उन्होंने बताया कि मांड्या जिला दुग्ध उत्पादक संघ (मनमूल) भी गेज्जलगेरे गांव में संचालित होता है। उन्होंने मुख्यमंत्री का ध्यान इस ओर दिलाया कि इन गांवों में रहने वाले लोगों के लिए सरकारी अस्पताल, शैक्षणिक संस्थान और अन्य बुनियादी सुविधाएं पहले से उपलब्ध हैं।

कुमारस्वामी ने आरोप लगाया कि गांवों को मद्दुर टाउन म्युनिसिपल काउंसिल में शामिल करने का निर्णय बिना पूर्व सूचना दिए, किसानों और स्थानीय निवासियों से सलाह किए बिना और ग्राम सभा बुलाए बिना लिया गया। ग्रामीणों का कहना है कि यह फैसला कुछ ग्राम पंचायत अध्यक्षों और कुछ सदस्यों ने एकतरफा तरीके से लिया, जिसमें कथित रूप से बहुमत की अनदेखी की गई और ग्राम पंचायत अधिनियम के नियमों का उल्लंघन हुआ।

उन्होंने यह भी बताया कि गांव के लोगों, किसानों और अन्य निवासियों ने इस फैसले को चुनौती देते हुए कर्नाटक हाई कोर्ट में जनहित याचिका दायर की है।
 

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