पीएम मोदी के वाराणसी ने रचा गिनीज इतिहास, एक घंटे में 2.5 लाख पौधे लगाकर तोड़ा विश्व रिकॉर्ड

प्रधानमंत्री मोदी के निर्वाचन क्षेत्र वाराणसी ने बनाया रिकॉर्ड, एक घंटे में लगाए गए 2.5 लाख पौधे


वाराणसी, 1 मार्च। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में रविवार को एक रिकॉर्ड बनाया गया। अधिकारियों के अनुसार, एक घंटे से भी कम समय में 2.5 लाख से ज्यादा पौधे लगाए गए, जो चीन द्वारा बनाए गए रिकॉर्ड को तोड़ा गया।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में रविवार को एक ऐतिहासिक रिकॉर्ड कायम किया गया। गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स ने इसे आधिकारिक रूप से मान्यता दी।

गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स के अधिकारी और जज ऋषि नाथ ने मौके पर मौजूद होकर वाराणसी के महापौर अशोक कुमार तिवारी और नगर आयुक्त हिमांशु नागपाल को प्रमाणपत्र देकर रिकॉर्ड की पुष्टि की।

वाराणसी नगर निगम ने सुजाबाद-डोमरी क्षेत्र में बनने वाले जंगल में 2,51,446 पौधे लगाकर यह रिकॉर्ड स्थापित किया।

नगर निगम के एक अधिकारी ने कहा, “आज पीएम मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में वाराणसी नगर निगम ने एक ऐतिहासिक पहल की। एक घंटे से भी कम समय में 2.5 लाख से अधिक पौधे लगाए। इस अभियान में 20,000 से अधिक नागरिकों ने भाग लिया। यह जनभागीदारी का उत्कृष्ट उदाहरण है।”

एक अधिकारी ने बताया कि इससे पहले एक घंटे में सबसे ज्यादा पेड़ लगाने का रिकॉर्ड चीन के हेन्नान प्रांतीय समिति के पास था, जिन्होंने 2018 में 1,53,981 पेड़ लगाए थे।

अधिकारी ने बताया, "काशी (वाराणसी) ने यह रिकॉर्ड अपनी अच्छी योजना, व्यापक जनभागीदारी और आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल से पार किया। पूरी प्रक्रिया को ड्रोन निगरानी और डिजिटल गिनती प्रणाली से सटीक रूप से मॉनिटर किया गया।"

वाराणसी नगर निगम “नमो वन” नामक एक विशाल शहरी जंगल का विकास कर रहा है, जो डोमरी क्षेत्र में लगभग 350 बीघा भूमि में गंगा घाटों के पास बनाया जाएगा।

इस परियोजना के तहत कुल 3 लाख पौधे लगाए जाएंगे, जिनमें 2.5 लाख मियावाकी पद्धति के पौधे, 10,000 लकड़ी वाले पेड़ और 40,000 फलदार पेड़ शामिल हैं।

इसके अलावा, परियोजना में 4 किलोमीटर लंबी वॉकिंग पथ, ध्यान और योग का प्लाजा, 4 हेक्टेयर का फूलों का पार्क, 2 हेक्टेयर का हर्बल पार्क, बच्चों के खेलने के लिए जगह और खुला जिम प्लाजा भी शामिल होगा।

इस जंगल से जैव विविधता बढ़ेगी, गंगा के किनारे मजबूत होंगे और पारिस्थितिक संतुलन में सुधार होगा।

तीसरे साल से नगर निगम इस परियोजना से लगभग 2 करोड़ रुपए की वार्षिक आय उत्पन्न करने की उम्मीद कर रहा है, जो सातवें साल तक 7 करोड़ रुपए तक बढ़ सकती है।

भविष्य में यहां एक नेचुरोपैथी प्लाजा स्थापित करने की योजना भी है।
 

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