प्रतिबंध हटने के बाद भारत के चावल निर्यात में हुई 19.4 प्रतिशत की बढ़ोतरी

प्रतिबंध हटने के बाद भारत के चावल निर्यात में हुई 19.4 प्रतिशत की बढ़ोतरी


नई दिल्ली, 11 जनवरी। सरकार द्वारा चावल के निर्यात पर लगे सभी प्रतिबंध हटाने के बाद भारत के चावल निर्यात में पिछले साल 19.4 प्रतिशत की तेज बढ़ोतरी हुई। इसके साथ ही भारत का चावल निर्यात अब तक के दूसरे सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गया।

रिपोर्ट्स के अनुसार, पाबंदियां हटने से भारतीय चावल अंतरराष्ट्रीय बाजार में ज्यादा प्रतिस्पर्धी हो गया। इससे दुनिया के सबसे बड़े चावल निर्यातक के रूप में भारत की स्थिति और मजबूत हुई।

भारत के चावल की अंतरराष्ट्रीय बाजार में जोरदार वापसी से बाजार में चावल की आपूर्ति लगातार बनी रही। इसका असर यह हुआ कि थाईलैंड और वियतनाम जैसे अन्य चावल निर्यात करने वाले देशों का निर्यात कम हो गया।

चावल की ज्यादा उपलब्धता के कारण एशिया में चावल की कीमतें लगभग दस साल के सबसे निचले स्तर पर आ गईं।

कम कीमतों से गरीब उपभोक्ताओं को राहत मिली है, खासकर अफ्रीका और अन्य ऐसे देशों को, जो सस्ते चावल पर ज्यादा निर्भर रहते हैं।

दुनिया के चावल व्यापार में भारत की बढ़ती भूमिका अब पोषक तत्वों से भरपूर और ज्यादा मूल्य वाले चावल के निर्यात में भी दिखाई दे रही है।

हाल ही में कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीईडीए) ने छत्तीसगढ़ से पापुआ न्यू गिनी के लिए 20 मीट्रिक टन पोषक तत्व युक्त चावल के निर्यात में मदद की।

यह खेप भारत द्वारा अपने कृषि निर्यात को अलग-अलग देशों तक फैलाने और विदेशी बाजारों में अपनी पहचान बढ़ाने की दिशा में एक और कदम है।

फोर्टिफाइड चावल का उत्पादन जरूरी पोषक तत्व जैसे आयरन, फोलिक एसिड और विटामिन बी-12 मिलाकर किया जाता है। इस मिश्रण को इस तरह तैयार किया जाता है कि यह सामान्य चावल जैसा दिखे। बाद में इसे साधारण चावल में मिलाया जाता है, जिससे चावल की पौष्टिकता बढ़ जाती है।

अधिकारियों ने कहा कि ऐसे निर्यात से खाद्य पोषण के क्षेत्र में भारत की तकनीकी क्षमता सामने आती है और यह दुनिया की खाद्य और पोषण सुरक्षा में भारत के योगदान को दिखाता है।

छत्तीसगढ़ अब भारत के चावल निर्यात में एक महत्वपूर्ण राज्य बनकर उभरा है। यहां किसानों, चावल मिल मालिकों और निर्यातकों को लगातार सहयोग दिया जा रहा है।

पापुआ न्यू गिनी को भेजी गई खेप पोषण पर आधारित खाद्य आपूर्ति में राज्य की बढ़ती भूमिका को दिखाती है और भारत के उस लक्ष्य से मेल खाती है, जिसमें वह खुद को सुरक्षित, उच्च गुणवत्ता और ज्यादा मूल्य वाले कृषि उत्पादों का भरोसेमंद आपूर्तिकर्ता बनाना चाहता है।

एपीईडीए के अधिकारियों ने बताया कि संस्था गुणवत्ता बनाए रखने, लोगों को प्रशिक्षण देने और नए बाजारों से जोड़ने पर लगातार काम कर रही है, ताकि वैश्विक कृषि व्यापार में भारत की स्थिति और मजबूत हो सके।
 

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