मुंबई, 28 फरवरी। दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित हुए एआई समिट में यूथ कांग्रेस के विरोध पर शिवसेना (यूबीटी) के नेता आनंद दुबे ने कहा कि लोकतंत्र में आपको विरोध करने, हड़ताल करने और अपनी आवाज उठाने का अधिकार है, लेकिन इसकी भी एक लिमिट है। कांग्रेस को ऐसे कामों से बचना चाहिए जिनसे देश के हितों को नुकसान पहुंचे।
मुंबई में आईएएनएस से बातचीत में शिवसेना (यूबीटी) के नेता आनंद दुबे ने कांग्रेस को नसीहत देते हुए कहा कि जब मामला सेंसिटिव मुद्दों से जुड़ा हो या जब किसी बड़े आयोजन में मेहमान मौजूद हों, तो ऐसे कामों से देश की इमेज को नुकसान नहीं पहुंचाना चाहिए। आने वाले समय में, कांग्रेस को ऐसे कामों से बचना चाहिए जिनसे देश के हितों को नुकसान पहुंचे। बाकी सरकार की नीतियों की आलोचना करने के लिए बाबा साहेब ने हमें संवैधानिक अधिकार दिया है, लेकिन, विरोध करने का एक तरीका होता है। एआई का विरोध नहीं करना चाहिए। एआई दुनिया को दिशा देने का विषय है। भारत मुखरता के साथ आगे बढ़ेगा, हमें ऐसा विश्वास है।
दिल्ली शराब नीति केस में अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया को बरी किए जाने पर आनंद दुबे ने कहा कि इस देश में जब भी भाजपा को खतरा महसूस होता है, तो वह विरोधियों के खिलाफ ईडी और सीबीआई जैसी एजेंसियों का इस्तेमाल करती है, चाहे वह हेमंत सोरेन हों, संजय राउत हों या अरविंद केजरीवाल हों या फिर संजय सिंह और मनीष सिसोदिया हों। सभी की जांच होती है और आखिर में सभी बरी हो जाते हैं। अरविंद केजरीवाल के मामले में कोर्ट ने यहां तक कहा कि उनसे ज्यादा ईमानदार कोई नेता नहीं है और उनकी ईमानदारी को पहचाना। इससे भाजपा बौखला गई है। सरकार ने ईडी-सीबीआई के जरिए केजरीवाल के राजनीतिक करियर को खत्म करने का काम किया था।
आनंद दुबे ने कहा कि एसआईआर का कोई विरोध नहीं है, यह होना चाहिए। हालांकि जैसा कि आपने देखा होगा, बिहार चुनाव के दौरान 55 लाख से ज्यादा लोगों के नाम हटा दिए गए थे और मामला सुप्रीम कोर्ट में गया। इसी तरह पश्चिम बंगाल में मई और जून में चुनाव होंगे और अगर वोटर लिस्ट ठीक से अपडेट नहीं हुई, तो यह इलेक्शन कमीशन की नाकामी होगी। ममता बनर्जी सवाल चुनाव आयोग से करती हैं तो भाजपा नेताओं की ओर से जवाब मिलता है। अगर वोटर लिस्ट में गड़बड़ी है तो एसआईआर कराने का क्या मतलब है।