अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर 'भारती-नारी से नारायणी' का होगा शंखनाद: दिल्ली में जुटेंगी महिला शक्ति, गढ़ेंगी नई राह

अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर 'भारती-नारी से नारायणी' सम्मेलन का होगा आयोजन


नई दिल्ली, 28 फरवरी। महिलाओं के सम्मान में हर साल 8 मार्च को अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस मनाया जाता है। इस मौके पर राष्ट्र सेविका समिति, भारतीय विद्वत परिषद और शरण्या के तत्वावधान में एक विशेष राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन किया जा रहा है। "भारती – नारी से नारायणी" विषय पर आधारित महिला बुद्धिजीवियों का यह दो दिवसीय समागम 7 और 8 मार्च को नई दिल्ली स्थित विज्ञान भवन में संपन्न होगा।

इस सम्मेलन की थीम विद्या, मुक्ति, प्रकृति, सिद्ध, शक्ति, चेतना, संस्कृति और कृति है, जो महिला की भागीदारी और भूमिका पर केंद्रित होगी। इस सम्मेलन से जरूरी नीतियों के लिए सुझाव इकट्ठा करने, महिला विचार नेताओं के लिए ‘भारती’ नामक मंच का निर्माण और नियमित संवाद हेतु थिंक-टैंक सत्रों का आयोजन, विभिन्न क्षेत्रों के अनुसार महिला नेतृत्व समूहों का गठन, जो महिलाओं और पुरुषों का मार्गदर्शन करें, राष्ट्र के रणनीतिक विकास मार्ग को तैयार करने हेतु महिलाओं के मुद्दे पर विचार करने वाले नेताओं का एक सशक्त नेटवर्क बनाना और महिला विचार नेताओं के वार्षिक सम्मेलन के लिए एक रोडमैप तैयार करने की उम्मीद है।

इस कार्यक्रम को आयोजित करने के पीछे का विजन एक ऐसा इनक्लूसिव प्लेटफॉर्म बनाना है जो महिलाओं को कनेक्ट करने, कोलैबोरेट करने और को-क्रिएट सॉल्यूशन बनाने में मदद करें और आत्मनिर्भरता और एक विकसित भारत की ओर उनके सफर को बढ़ावा दे।

इसका मकसद अलग-अलग बैकग्राउंड की महिलाओं को एक साथ लाने वाला एक इंक्लूसिव प्लेटफॉर्म बनाना है। इसके साथ ही महिलाओं को मिलकर सिस्टम की रुकावटों को पहचानने और नीतियों की सिफारिशें और लोकल एक्शन प्लान को मिलकर बनाने में मदद करना, महिलाओं के समूह, सरकार, सिविल सोसायटी और प्राइवेट सेक्टर के बीच क्रॉस-सेक्टर साझेदारी को बढ़ावा देना ताकि पहचाने गए सॉल्यूशन को लागू किया जा सके और उन महिलाओं की कामयाबियों का जश्न मनाना जिन्होंने रुकावटों को पार किया है और समाज में बदलाव लाए हैं।

इस कार्यक्रम में भारतीय महिला नेताओं को आमंत्रित किया गया है। महिला नेताओं के साथ इन मुद्दों पर चर्चा की जाएगी कि महिलाओं के लिए क्या किया जा सकता है। हम जिस पर काम कर रहे हैं, वह है एक-दूसरे को जोड़ना, सपोर्ट करना और एक-दूसरे के साथ खड़े होना। हमें उनके साथ रहना चाहिए और जब उन्हें हमारी जरूरत हो तो उन्हें सपोर्ट करना चाहिए।

राष्ट्र सेविका समिति की प्रमुख कार्यवाहिका सीता गायत्री आंदनम और राष्ट्र सेविका समिति प्रांत प्रचार प्रमुख डॉ. रचना बाजपेयी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कार्यक्रम से संबंधित सभी जानकारी दी। सीता गायत्री आंदनम ने कहा, "भारती नारी से नारायणी समिट शक्ति का सम्मेलन है। यह महिलाओं के गौरव का एक समारोह है। यह उद्घोष नहीं है, किंतु यह सामाजिक परिवर्तन की यात्रा है जो अभी चल रही है, जिसमें एक सकारात्मक शक्ति को एकत्रित करने का प्रयास है। राष्ट्र सेविका समिति संगठन 90 सालों से समाज में महिलाओं की जो ताकत है, जो अंतःचेतना उनके अंदर है, उस चेतना को फिर से एक एक बार समाज को परिचित कराने का काम कर रही है। यह समिति केवल महिलाओं के लिए नहीं, पूरे समाज के विकास के लिए अनेक वर्षों से काम कर रही है।"

उन्होंने आगे कहा कि महिलाओं के अंदर के तीन प्रकार के गुणों के द्वारा हम समाज में बहुत अच्छी ताकत जो थी, उसे फिर से खड़ा करने का प्रयास कर रहे हैं। वो तीन गुण हैं मातृत्व, कर्तृत्व और नेतृत्व। मातृत्व यानी केवल अपने परिवार के बच्चों के लिए नहीं, बल्कि पूरे समाज को खड़ा कर सकती हैं।

राष्ट्र सेविका समिति प्रांत प्रचार प्रमुख डॉ. रचना बाजपेयी ने कहा, "सेविकाओं को संगठन के काम में लगाना उनका विशेष गुण है। संगठन सर्वव्यापी और सर्वस्पर्शी हो, इसके लिए आप कार्यकर्ताओं को नए-नए विषय देकर उनका मार्गदर्शन करती हैं।"

भारतीय विद्वत परिषद सचिव वी. शिवानी ने कहा, "असल में, हम सब संस्कृत के विद्वान हैं। भारती विद्युत परिषद संस्कृत के स्कॉलर पर काम कर रही है और इंटरडिसिप्लिनरी रिसर्च पर काम कर रही है। लेकिन यहां, हम एक अलग मकसद से काम कर रहे हैं। यह सिर्फ संस्कृत पर ही नहीं, बल्कि सामाजिक समरसता पर केंद्रित है। सामाजिक दृष्टि में, हम इस पर काम कर रहे हैं और हमारे पास संस्कृत पर कुछ पब्लिकेशन हैं। उदाहरण के लिए, हमारे पास एक नारीभाषित है, जो सुभाषित है।"

उन्होंने कहा कि हमने सभी शास्त्रों और दूसरे टेक्स्ट से सभी सुभाषित इकट्ठा किए हैं और हम पब्लिश कर रहे हैं। हमारे पास दो से तीन पब्लिकेशन हैं। और साथ ही, हमने कुछ संस्कृत स्कॉलर और संस्कृत यूनिवर्सिटी के वाइस-चांसलर और कुछ गुरुकुल को भी बुलाया है। क्योंकि विद्या के लिए, हमने गुरुकुल एजुकेशन और सब को बुलाया है। लेकिन इस सेशन के लिए हम सिर्फ़ संस्कृत सेशन नहीं कर रहे हैं।

महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अपराध को लेकर वी शिवानी ने कहा, "इस वजह से ही हमें समाज को बदलने की जरूरत है। मानसिकता को भी बदलने की जरूरत है। ऐसा करने के लिए हमें सभी महिलाओं के साथ खड़े रहने की जरूरत है। अगर हम सांस्कृतिक शिक्षा देंगे, तो यह अपराध काफी हद तक कम हो सकता है। अगर कोई समस्या सामने आती है, तो अगर हम साथ मिलकर इससे लड़ते हैं, तो इसे कम किया जा सकता है।"
 

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