नई दिल्ली, 27 फरवरी। भारत का राजकोषीय घाटा चालू वर्ष 26 की शुरुआत से जनवरी के अंत तक 9.8 लाख करोड़ रुपए रहा है, जो कि पूरे वित्त वर्ष के लक्ष्य का 63 प्रतिशत है।
वित्त मंत्रालय की ओर से जारी किए गए आंकड़ों में बताया गया कि भारत सरकार को जनवरी 2026 तक 27,08,654 करोड़ रुपए प्राप्त हुए हैं, जो कि पूरे वित्त वर्ष 2025-26 के लिए निर्धारित संशोधित अनुमान 79.5 प्रतिशत है।
इसमें 20,94,218 करोड़ रुपए कर राजस्व (केंद्र को प्राप्त शुद्ध राशि), 5,57,307 करोड़ रुपए गैर-कर राजस्व और 57,129 करोड़ रुपए गैर-ऋण पूंजीगत प्राप्तियां शामिल हैं। इस अवधि के दौरान भारत सरकार द्वारा राज्य सरकारों को करों के हिस्से के हस्तांतरण के रूप में 11,39,767 करोड़ रुपए का भुगतान किया गया है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 65,588 करोड़ रुपए अधिक है।
इस अवधि के दौरान भारत सरकार द्वारा किया गया कुल व्यय 36,90,061 करोड़ रुपए रहा है, जो कि वित्त वर्ष 2025-26 के संशोधित कुल व्यय अनुमान का 74.3 प्रतिशत है, जिसमें से 28,47,780 करोड़ रुपए राजस्व मद पर और 8,42,281 करोड़ रुपए पूंजी मद पर व्यय किए गए है।
कुल राजस्व व्यय में से 9,88,302 करोड़ रुपए ब्याज भुगतान के मद पर और 3,54,861 करोड़ रुपए प्रमुख सब्सिडी के मद पर व्यय किए गए हैं।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 2026-27 के लिए राजकोषीय घाटे को सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के 4.3 प्रतिशत तक और कम करने का अनुमान लगाया है।
1 फरवरी को अपने बजट भाषण में उन्होंने कहा कि सरकार ने 2025-26 के बजट में राजकोषीय घाटे को 4.4 प्रतिशत तक कम करने की अपनी प्रतिबद्धता पूरी कर ली है और अब राजकोषीय विवेक के पथ पर अग्रसर रहते हुए इसे और कम करके 4.3 प्रतिशत तक लाएगी।
उन्होंने कहा कि यह लक्ष्य आर्थिक गति को बनाए रखने और सार्वजनिक वित्त को स्थिर रखने के बीच संतुलन को दर्शाता है।
राजकोषीय घाटा सरकार के कुल व्यय और कुल राजस्व के बीच का अंतर होता है।