महाराष्ट्र के 54 लाख से अधिक किसानों को कर्जमाफी का इंतजार, समिति की रिपोर्ट अटकी, डेटा विश्लेषण जारी

महाराष्ट्र में कर्जमाफी पर समिति की रिपोर्ट लंबित, 54 लाख से अधिक ऋण खातों का डाटा विश्लेषण जारी: बाबासाहेब पाटिल


मुंबई, 27 फरवरी। महाराष्ट्र में किसानों को कर्ज के बोझ से राहत दिलाने के उद्देश्य से राज्य सरकार ने 30 अक्टूबर 2025 को एक उच्चस्तरीय समिति गठित की थी। किसानों को रहत देने के लिए इस समिति को तत्काल और दीर्घकालिक रणनीतियां तैयार करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। यह जानकारी सहकारिता मंत्री बाबासाहेब पाटिल ने शुक्रवार को दी।

शिवसेना-यूबीटी नेता भास्कर जाधव, भाजपा नेता प्रशांत ठाकुर और अन्य सदस्यों द्वारा पूछे गए एक प्रश्न के लिखित उत्तर में मंत्री बाबासाहेब पाटिल ने राज्य विधानसभा को सूचित किया कि समिति ने अभी तक अपनी अंतिम रिपोर्ट पेश नहीं की है, लेकिन वह वर्तमान में बैंकों से जून 2025 तक के कृषि ऋणों और 30 सितंबर, 2025 तक के बकाया ऋणों से संबंधित डाटा और पिछले पांच वर्षों में लगातार ऋण चुकाने वाले किसानों के रिकॉर्ड की जांच कर रही है।

मंत्री ने बताया कि अनुमानित 54.63 लाख ऋण खातों में से 52.80 लाख खातों का डाटा मिल हो चुका है और वर्तमान में कंप्यूटर प्रोसेसिंग के माध्यम से इसका विश्लेषण किया जा रहा है।

मंत्री बाबासाहेब पाटिल ने कहा कि 2017 की ऋण माफी योजना के तहत छह लाख से अधिक किसान अभी लाभ की प्रतीक्षा कर रहे हैं। 50.60 लाख पात्र किसानों में से 44.04 लाख किसानों को लाभ मिल चुका है। सरकार ने पुष्टि की कि बाकी 6.56 लाख किसानों को लाभ पहुंचाने की प्रक्रिया वर्तमान में जारी है।

महात्मा फुले योजना के तहत, आधार प्रमाणीकरण कराने वाले 14.50 लाख किसानों को नियमित ऋण पुनर्भुगतान के लिए प्रोत्साहन अनुदान प्राप्त हुआ है। मंत्री के अनुसार, खरीफ 2025 के मौसम में भारी बारिश और बाढ़ के मद्देनजर, सरकार ने राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति (एसएलबीसी) और जिला बैंकों को निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने कहा कि इन निर्देशों में प्रभावित तालुकों में सहकारी फसल ऋणों का पुनर्गठन शामिल है। इसके अलावा, संकटग्रस्त किसानों को तत्काल राहत प्रदान करने के लिए कृषि संबंधी ऋणों की वसूली पर एक वर्ष की रोक लगाई गई है।

सहकारिता मंत्री बाबासाहेब पाटिल ने बताया कि निधि की कमी के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि तीन दिसंबर, 2025 को 2017 की योजना के निरंतर कार्यान्वयन के लिए कंप्यूटर प्रणाली को मंजूरी दे दी गई थी। 2025 के शीतकालीन सत्र के दौरान 500 करोड़ रुपये की निधि स्वीकृत की गई थी। इसके अलावा सरकार ने इन कल्याणकारी कार्यक्रमों की निरंतरता सुनिश्चित करने के लिए 2026-27 वित्तीय वर्ष के लिए 5,175.51 करोड़ रुपये के बजट का अनुरोध किया है।

मंत्री की यह प्रतिक्रिया मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस द्वारा गुरुवार को राज्यपाल के अभिभाषण पर हुई बहस के उत्तर में दिए गए बयान के एक दिन बाद आई है, जिसमें उन्होंने कहा था कि ऋण माफी प्रक्रिया का अध्ययन करने के लिए एक समर्पित समिति का गठन किया गया है और उसकी रिपोर्ट का इंतजार है। उन्होंने सदन को आश्वासन दिया कि सरकार उचित समय पर अपना वादा पूरा करेगी।

पिछली फसल ऋण माफी योजनाओं से मिले सबक को लेकर मुख्यमंत्री फडणवीस ने विशेष रूप से बैंकिंग संबंधी अनियमितताओं के संबंध में महत्वपूर्ण अनियमितताओं की ओर इशारा किया। पहले भी सरकार ने ऋण माफी के दौरान पाया है कि बैंक अक्सर गलत खाता जानकारी देते हैं। कुछ बैंक तो सरकारी धन की हेराफेरी करने के लिए पुराने, निष्क्रिय खातों को भी सक्रिय कर देते हैं।

उन्होंने कहा कि इस तरह की धोखाधड़ी को रोकने के लिए राज्य सरकार एक पूर्ण 'कृषि-संग्रह' प्रणाली विकसित कर रही है। यह कृषि का एक व्यापक डिजिटल रिकॉर्ड होगा, जिसमें किसान पंजीकरण डेटा, भूमि स्वामित्व रिकॉर्ड, 7/12 रिपोर्ट और आधार-लिंक्ड सत्यापन जैसी सुविधाएं शामिल होंगी।
 

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