महाराष्ट्र: नागपुर में मनी लॉन्ड्रिंग मामले में ईडी ने 3.35 करोड़ की संपत्ति कुर्क की

महाराष्ट्र: नागपुर में मनी लॉन्ड्रिंग मामले में ईडी ने 3.35 करोड़ की संपत्ति कुर्क की


नागपुर, 6 फरवरी। नागपुर में प्रवर्तन निदेशालय के उप-क्षेत्रीय कार्यालय ने बड़ी कार्रवाई करते हुए धन शोधन निवारण अधिनियम, 2002 के तहत सचिन शत्रुघ्न पांडे और उनके परिवार से जुड़ी 3.35 करोड़ रुपए की अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से कुर्क कर लिया है। कुर्क की गई संपत्तियों में तीन व्यावसायिक दुकानें और कुल 10.37 एकड़ क्षेत्रफल वाली दो जमीनें शामिल हैं। ईडी ने यह कार्रवाई प्राथमिक जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर की है।

ईडी ने अपनी जांच की शुरुआत नागपुर के धंतोली और सीताबर्डी पुलिस थानों में भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत दर्ज एफआईआर के आधार पर की थी। इन मामलों में सचिन शत्रुघ्न पांडे और उनके सहयोगियों पर आपराधिक गतिविधियों में शामिल होने के आरोप हैं। जांच में सामने आया कि पांडे और उनकी पत्नी खुशी पांडे का नागपुर की दो संपत्तियों में कोई वैध हिस्सा नहीं था, इसके बावजूद उन्होंने शिकायतकर्ता के साथ संपत्ति से जुड़ा एक समझौता किया। बाद में जब संपत्ति का विधिवत हस्तांतरण नहीं हुआ, तो आरोपियों ने 31 मार्च 2013 तक पैसे लौटाने का वादा करते हुए एक कैंसलेशन एग्रीमेंट किया।

हालांकि, जांच एजेंसी के अनुसार, आरोपियों ने जानबूझकर समझौते की शर्तों का पालन नहीं किया और शिकायतकर्ता को 2.2 करोड़ रुपए वापस नहीं किए। इस रकम का निजी लाभ के लिए उपयोग किया गया, जिससे शिकायतकर्ता को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा।

जांच के दौरान यह भी पता चला कि सचिन पांडे और उनके सहयोगियों ने चंद्रप्रकाश वाधवानी को उनकी कंपनी मेसर्स लुफ्ट इंटरनेशनल प्राइवेट लिमिटेड के माध्यम से बिना किसी सुरक्षा के 18 करोड़ रुपए का विदेशी ऋण दिलाने का झांसा दिया। आरोप है कि लोन की व्यवस्था के नाम पर मार्जिन मनी के रूप में 1.2 करोड़ रुपए नकद लिए गए। न तो वादा पूरा किया गया, न ही ऋण दिलाया गया, और न ही ली गई राशि वापस की गई। ईडी के अनुसार, इस तरह शिकायतकर्ता को 1.2 करोड़ रुपए का अतिरिक्त नुकसान हुआ।

धन शोधन निवारण अधिनियम के तहत की गई जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी को प्राप्त रकम का एक हिस्सा उनके और उनके परिवार के सदस्यों तथा संबंधित कंपनियों के बैंक खातों में जमा किया गया। जांच में पाया गया कि लगभग 90 लाख रुपए पायनियर ग्रुप की एक परियोजना में फ्लैट खरीदने में लगाए गए, 20 लाख रुपए सहयोगी स्वर्णिम जयकुमार दीक्षित के खाते में ट्रांसफर किए गए और 70 लाख रुपए से अधिक की राशि रोजमर्रा के निजी खर्चों में खर्च की गई। इसके अलावा कुछ धनराशि का उपयोग आरोपी की पत्नी के भारत और विदेश में हुए इलाज पर तथा अन्य अचल संपत्तियां खरीदने में किया गया। मामले में आगे की जांच जारी है।
 

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