ईरान में इंटरनेट ब्लैकआउट जारी, तेहरान की चेतावनी के बाद हाई अलर्ट पर इजरायल

iran protesters on streets


नई दिल्ली, 11 जनवरी। ईरान में आम लोगों का विरोध प्रदर्शन 14वें दिन में प्रवेश कर चुका है। एक-एक कर देश के हर कोने से सरकार के खिलाफ आवाज उठ रही है। इंटरनेट ब्लैकआउट के भी 60 घंटे हो चुके हैं। इस बीच अमेरिका की चेतावनी से तेहरान का सियासी हलका काफी नाराज है। संसद के अध्यक्ष ने यूएस राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की चेतावनी का जवाब धमकी से दिया है।

ईरान के संसद अध्यक्ष ने चेतावनी दी कि अगर अमेरिका इस्लामी गणराज्य पर हमला करता है तो अमेरिकी सेना और इजरायल निशाने पर होंगे। कालीबाफ ने यह धमकी तब दी जब ईरानी संसद में सांसद मंच की ओर दौड़े और अमेरिका विरोधी नारे लगाए। ईरानी राज्य टेलीविजन ने संसद सत्र को लाइव प्रसारित किया।

कालीबाफ एक कट्टरपंथी नेता हैं और पहले राष्ट्रपति पद का चुनाव लड़ चुके हैं। उन्होंने पुलिस और ईरान की पैरामिलिट्री रिवॉल्यूशनरी गार्ड को प्रदर्शनों के दौरान दृढ़ रहने के लिए सराहा।

कालीबाफ ने कहा, 'ईरान के लोगों को पता होना चाहिए कि हम उनके साथ सबसे कठोर तरीके से निपटेंगे और गिरफ्तार लोगों को सजा देंगे।'

उन्होंने इजरायल को कब्जे वाला क्षेत्र कहते हुए सीधे धमकी दी। उन्होंने कहा, 'ईरान पर हमले की स्थिति में कब्जे वाला क्षेत्र और क्षेत्र में सभी अमेरिकी सैन्य केंद्र, अड्डे और जहाज हमारे वैध निशाने होंगे।

द टाइम्स ऑफ इजरायल के अनुसार, ईरान में चल रहे सरकार-विरोधी आंदोलन में यूएस के दखल की संभावना को देखते हुए इजरायल हाई अलर्ट पर है।

वहीं, इंटरनेट पाबंदी की मियाद भी बढ़ गई है। इंटरनेट मॉनिटर नेटब्लॉक्स का कहना है कि ईरान में सरकार के खिलाफ प्रदर्शनों के दौरान देश भर में इंटरनेट बंद किया गया था, जो अब 60 घंटे से ज्यादा हो गया है।

आईआरजीसी से जुड़े तस्नीम न्यूज के मुताबिक विरोध प्रदर्शन बेहद हिंसक हो गया है। प्रदर्शनकारी शनिवार रात को ईरान के फार्स प्रांत के ममासानी काउंटी में न्यायपालिका परिसर में घुस गए और एक गार्ड पोस्ट में आग लगा दी।

काउंटी के पब्लिक और रेवोल्यूशनरी प्रॉसिक्यूटर हसन इलाही ने बताया कि कोर्टहाउस के अंदर कई कमरों में आग लगा दी गई और सिक्योरिटी फोर्स के आने और भीड़ को हटाने से पहले आग ग्राउंड फ्लोर से पहली मंजिल तक फैल गई थी।
 
ईरान की जनता पिछले 14 दिनों से जिस तरह अपनी मांगों के लिए खड़ी है, वह उनकी हिम्मत को दर्शाता है। सरकार को डराने-धमकाने के बजाय लोगों की शिकायतों को सुनना चाहिए। जब तक बुनियादी मुद्दों का हल नहीं होगा, विरोध जारी रहेगा।
 

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