आईसीएमआर का 'संवाद 2026': शोध को जन-जन तक पहुंचाने पर ज़ोर, युवा शोधार्थियों को मिला विशेषज्ञों का मार्गदर्शन

आईसीएमआर का ‘संवाद 2026: शोध को प्रभावी तरीके से लोगों तक पहुंचाने पर जोर, वक्ताओं ने दिया मार्गदर्शन


नई दिल्ली, 22 फरवरी। भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर), स्वास्थ्य अनुसंधान विभाग (डीएचआर), स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के तहत, 19 से 21 फरवरी 2026 तक नई दिल्ली स्थित आईसीएमआर–राष्ट्रीय मलेरिया अनुसंधान संस्थान (एनआईएमआर) में ‘संवाद 2026’ (स्कॉलर्स’ असेंबली फॉर नेक्स्ट-जेन वेंचर्स टू एडवांस देयर डेवलपमेंट) का आयोजन किया गया।

‘संवाद’ आईसीएमआर की एक वार्षिक पहल है, जिसे देशभर के पीएचडी शोधार्थियों को जोड़ने के लिए एक राष्ट्रीय मंच के रूप में तैयार किया गया है। हर साल इसे अलग-अलग आईसीएमआर संस्थान में आयोजित किया जाता है, ताकि शोध संस्थानों के बीच सहयोग बढ़े और शोधार्थियों को विभिन्न शोध वातावरण का अनुभव मिले।

इस कार्यक्रम का उद्देश्य पीएचडी शोध की गुणवत्ता बढ़ाना, युवा शोधकर्ताओं को उत्कृष्टता के लिए प्रेरित करना और भारत के ज्ञान तंत्र को मजबूत करना है। तीन दिवसीय कार्यक्रम ‘संवाद 2026’ में देशभर से लगभग 400 शोधार्थियों के साथ वरिष्ठ वैज्ञानिक, नीति-निर्माता और शिक्षाविद शामिल हुए।

कार्यक्रम में कई प्रतिष्ठित वक्ताओं ने भाग लिया। पद्मश्री प्रो. अनिल कुमार गुप्ता ने शोधार्थियों को समाज की जरूरतों और जमीनी नवाचार से जुड़े शोध करने के लिए प्रेरित किया। डॉ. विश्वजीत कुमार ने कहा कि शोध को समाज तक पहुंचाना जरूरी है। पद्मश्री प्रो. कामेश्वर प्रसाद ने क्लीनिकल रिसर्च पर सत्र में लैब से मरीज तक शोध को पहुंचाने की अहमियत बताई।

'हेल्थ कम्युनिकेशन—विज्ञान को प्रभावी रूप से लोगों तक पहुंचाना’ विषय पर एक विशेष सत्र भी हुआ। इसमें बताया गया कि शोध सिर्फ प्रकाशित करने तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि उसे नीति निर्माण और समाज में बदलाव लाने के लिए सही तरीके से समझाया और साझा किया जाना चाहिए।

अंतिम दिन स्वास्थ्य अनुसंधान विभाग के सचिव और आईसीएमआर के महानिदेशक डॉ. राजीव बहल के साथ टाउन हॉल सत्र हुआ। उन्होंने शोधार्थियों से कहा कि वे गंभीर और सार्थक शोध करें और केवल औपचारिकता के लिए शोध न करें। उन्होंने उच्च गुणवत्ता वाले शोध पत्र लिखने और तनाव को सही तरीके से संभालने पर भी जोर दिया।

कार्यक्रम में ‘सिस्टेमैटिक रिव्यू’, राष्ट्रीय शोध संसाधन (जैसे एनएएमएस, ओएनओएस, आईएनएफएलआईबीनेट) और ‘पीएचडी के बाद क्या?’ जैसे विषयों पर सत्र आयोजित किए गए। इनसे शोधार्थियों को करियर और शोध संसाधनों की बेहतर समझ मिली।

समापन सत्र में आईसीएमआर–एनआईएमआर के निदेशक डॉ. अनुप अन्वीकर ने शोधार्थियों की सराहना की और कहा कि ‘संवाद 2026’ शोध सहयोग और नए वैज्ञानिक नेतृत्व को बढ़ावा देने वाला एक महत्वपूर्ण मंच है।
 

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