आरटीआई की धार लौटानी है अब! कांग्रेस का ऐलान, कानून को बचाने राष्ट्रीय कॉन्क्लेव आयोजित करने का प्रस्ताव

आरटीआई तंत्र को पुनर्जीवित करने की तैयारी में कांग्रेस, राष्ट्रीय कॉन्क्लेव का प्रस्ताव


नई दिल्ली, 22 फरवरी। कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर सूचना के अधिकार (आरटीआई) कानून को कमजोर करने का आरोप लगाते हुए इसे मूल स्वरूप में बहाल करने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर एक कॉन्क्लेव आयोजित करने का प्रस्ताव रखा है।

पार्टी के एआईसीसी विधि, मानवाधिकार और आरटीआई विभाग के अध्यक्ष अभिषेक सिंघवी ने रविवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि आरटीआई कानून को उसकी “मूल ताकत और स्वरूप” में बहाल करना पार्टी का उद्देश्य है। उन्होंने कहा कि कानूनी कदमों के साथ-साथ एक राष्ट्रीय कॉन्क्लेव आयोजित किया जाएगा, जिसमें पूर्व अधिकारी, आरटीआई कार्यकर्ता, सामाजिक कार्यकर्ता, पत्रकार और नीति विशेषज्ञ शामिल होंगे।

उन्होंने बताया कि इस कॉन्क्लेव के बाद एक व्यापक रिपोर्ट तैयार की जाएगी, जिसमें सुझाव और निष्कर्ष शामिल होंगे। इस रिपोर्ट को सार्वजनिक किया जाएगा और इसे विभिन्न हितधारकों, विधायकों तथा नागरिकों के साथ साझा किया जाएगा।

सिंहवी ने आरोप लगाया कि वर्तमान सरकार द्वारा आरटीआई कानून को “टुकड़ों-टुकड़ों में कमजोर” किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि आरटीआई अधिनियम ने देश में पारदर्शिता की नई दिशा दी थी, लेकिन अब इसे डेटा संरक्षण प्रावधानों के नाम पर सूचना दबाकर कमजोर किया जा रहा है।

एआईसीसी विधि विभाग ने चार नए कार्यक्रमों की घोषणा की है, जिनका उद्देश्य युवा वकीलों के साथ जुड़ाव बढ़ाना, कानूनी नेटवर्क को पुनर्जीवित करना और आरटीआई कानून के कथित कमजोर किए जाने के खिलाफ आवाज उठाने वालों को मंच देना है। इन पहलों में लीगल फेलोज़ प्रोग्राम, विधि-मानवाधिकार एवं आरटीआई विभाग का पॉडकास्ट सीरीज़, रैपिड रिस्पॉन्स फोर्स और ‘आरटीआई अधिनियम को पुनः प्राप्त करने’ के लिए राष्ट्रीय कॉन्क्लेव शामिल हैं।

सिंहवी ने कहा कि कांग्रेस सिविल सोसाइटी के साथ मिलकर आरटीआई कानून को कमजोर किए जाने के खिलाफ अदालत में याचिका दायर कर रही है और वह स्वयं इस मामले में अदालत में पेश होकर पैरवी करेंगे।

इस मौके पर वरिष्ठ कांग्रेस नेता और एआईसीसी कोषाध्यक्ष अजय माकन ने कहा कि सिंघवी और उनकी टीम द्वारा प्रस्तावित पहलें पार्टी और उसकी विचारधारा के लिए महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने इन कार्यक्रमों के लिए एआईसीसी की ओर से पूर्ण वित्तीय समर्थन का संकेत भी दिया।

सिंघवी ने बताया कि रैपिड रिस्पॉन्स फोर्स के तहत प्रत्येक जिले में कम से कम पांच वकीलों का डेटाबेस तैयार किया जा रहा है, जो जरूरत पड़ने पर पार्टी नेताओं को कानूनी सहायता प्रदान करेंगे। उन्होंने कहा कि यह पहल विशेष रूप से जमीनी स्तर के नेताओं को कानूनी सहयोग देने के लिए है, जो अक्सर धमकी और दबाव का सामना करते हैं।

उन्होंने बताया कि विभिन्न राज्यों से प्राप्त नामों के आधार पर एक डिजिटल डायरेक्टरी तैयार की जा रही है और रैपिड रिस्पॉन्स फोर्स के सदस्यों को जिम्मेदारियां सौंपी जाएंगी।
 

Similar threads

Latest Replies

Trending Content

Forum statistics

Threads
9,455
Messages
9,490
Members
19
Latest member
Jessantict5434
Back
Top