बाबूलाल मरांडी का हेमंत सरकार पर तीखा वार, बोले- राज्यपाल का अभिभाषण नहीं, बेबस सरकार का 'फेल रिपोर्ट कार्ड' था

झारखंड विधानसभा में बोले बाबूलाल मरांडी- राज्यपाल के अभिभाषण में झलकी सरकार की ‘बेबसी’


रांची, 19 फरवरी। झारखंड विधानसभा के बजट सत्र के दूसरे दिन गुरुवार को राज्यपाल के अभिभाषण पर चर्चा के दौरान नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने हेमंत सोरेन के नेतृत्व वाली राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने सरकार पर विभिन्न क्षेत्रों में विफल रहने का आरोप लगाते हुए कानून-व्यवस्था, भूमि अधिग्रहण, खनन, बजट घोषणाओं और प्रशासनिक नियुक्तियों से जुड़े कई मुद्दे सदन में उठाए।

चर्चा की शुरुआत में मरांडी ने एप्सटीन फाइल्स के संदर्भ में हुई टिप्पणी से प्रधानमंत्री का नाम कार्यवाही से हटाने की मांग की। राज्यपाल के अभिभाषण पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा कि यह सरकार द्वारा तैयार दस्तावेज होता है, जिसे राज्यपाल पढ़ते हैं, लेकिन इस बार अभिभाषण “बेबस” नजर आया।

मरांडी ने 26 जनवरी को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के विदेश में रहने पर सवाल खड़ा किया। उन्होंने कहा कि गणतंत्र दिवस पर राज्य में अपने संवैधानिक दायित्वों को छोड़कर मुख्यमंत्री का विदेश दौरे पर रहना क्या उचित था? उन्होंने झारखंड की महान विभूतियों और इतिहास पुरुषों बिरसा मुंडा, जयपाल सिंह मुंडा और दिशोम गुरु का उल्लेख करते हुए उनकी प्रतिमाएं स्थापित करने और उनके संघर्षों पर आधारित एक समर्पित पुस्तकालय बनाने की मांग की।

उन्होंने कहा कि जल, जंगल और जमीन के लिए राज्य के लोगों का संघर्ष आज भी जारी है। उन्होंने जसीडीह और दुमका के अमड़ापाड़ा क्षेत्र में उद्योग और कोल ब्लॉक परियोजनाओं के नाम पर भूमि अधिग्रहण से विस्थापन का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि उपजाऊ आदिवासी कृषि भूमि के बजाय बंजर जमीन पर उद्योग लगाए जाएं और विस्थापित परिवारों का समुचित पुनर्वास सुनिश्चित किया जाए।

रांची में रिम्स-2 परियोजना के लिए भूमि चयन पर भी उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि दशकों पहले अधिग्रहित जमीन पर वर्तमान में खेती हो रही है, इसलिए वैकल्पिक बंजर भूमि का उपयोग किया जाना चाहिए। इस दौरान मंत्री इरफान अंसारी ने भाजपा और आरएसएस पर आदिवासी जमीन पर कार्यालय बनाने का आरोप लगाया, जिस पर मरांडी ने कहा कि वे अस्पताल के विरोधी नहीं, बल्कि भूमि चयन के तरीके के खिलाफ हैं।

मरांडी ने कानून-व्यवस्था, पूर्व डीजीपी की नियुक्ति प्रक्रिया, कथित शराब घोटाले, एसीबी की कार्यप्रणाली, सूचना आयुक्त के रिक्त पद, खनिज ब्लॉकों की नीलामी और धान खरीद लक्ष्य पूरे न होने जैसे मुद्दे भी उठाए। बहस के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक देखी गई।
 
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