पटना, 19 फरवरी। बिहार विधानमंडल के बजट सत्र के दौरान सत्ता पक्ष हो या विपक्ष, शराबबंदी कानून को असफल करार देते हुए इसकी समीक्षा की बात कर रहा है। इस बीच, राजद के विधान पार्षद सुनील कुमार ने गुरुवार को कहा कि कोई भी ऐसा क्षेत्र बिहार में नहीं है, जहां शराब नहीं मिल रही है।
उन्होंने तो यहां तक कह दिया कि प्रेमभाव से कहीं भी खोजिए, शराब उपलब्ध हो जाएगी। विधान मंडल परिसर में भी शराब की आपूर्ति हो जाएगी। उन्होंने मीडिया से बातचीत में कहा, "बिहार के कई ऐसे विधायक या विधान पार्षद हैं, जिनके आवास पर शराब की बोतलें खुलती हैं। वहां पर लोग सामूहिक रूप से शराब पीते हैं, लेकिन मैं नाम लेना उचित नहीं समझता हूं। सत्तारूढ़ पार्टी से जुड़े हुए वे लोग हैं। बहुत शक्तिशाली लोग हैं।"
पूर्व मुख्यमंत्री लालू यादव के करीबी और एमएलसी सुनील कुमार ने आगे दावा करते हुए कहा कि जिस समय बिहार में शराबबंदी नहीं थी, उस समय से भी ज्यादा शराब की बिक्री आज हो रही है। पूरा बिहार आज 'उड़ता पंजाब' बन गया है।
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार शराबबंदी लागू कर नई पीढ़ी के नस्ल को खराब कर रही है। युवा सूखे नशे के शिकार हो रहे हैं। हमारी आने वाली पीढ़ी बर्बाद हो गई।
उन्होंने कहा कि प्रत्येक वर्ष 25 हजार करोड़ रुपए की अवैध कमाई करने का एक साम्राज्य खड़ा हो गया है। शराबबंदी के 11 साल हो गए। इस तरह देखा जाए तो 2.50 लाख करोड़ रुपए का अवैध शराब का धंधा इस बिहार में हो चुका है। जितने भी स्कूल के बच्चे हैं, सूखे नशे के शिकार हो रहे हैं।
उन्होंने जोर देकर कहा कि निश्चित रूप से शराबबंदी कानून की समीक्षा होनी चाहिए। जिस तरह भगवान कहीं दिखते नहीं हैं, उसी तरह शराब कहीं दिखती नहीं है, लेकिन उपलब्ध सभी जगह है।
उपेंद्र कुशवाहा के नेतृत्व वाली राष्ट्रीय लोक मोर्चा दल ने भी विधानसभा में कानून की समीक्षा की मांग की। पार्टी विधायक माधव आनंद ने सदन में कहा कि कानून पारित होने के बावजूद शराब अवैध रूप से उपलब्ध है और राज्य को राजस्व का नुकसान उठाना पड़ रहा है।