बिहार राज्यसभा चुनाव में एआईएमआईएम की एंट्री, अख्तरुल ईमान का दो टूक: खुद लड़ेंगे, समर्थन नहीं देंगे

एआईएमआईएम के बिहार प्रदेश अध्यक्ष अख्तरुल ईमान ने की राज्यसभा चुनाव में उम्मीदवार उतारने की घोषणा


पटना, 19 फरवरी। बिहार की पांच राज्यसभा सीटों के लिए होने वाले चुनाव को लेकर दोनों गठबंधनों एनडीए और महागठबंधन का गणित उलझ चुका है। बिहार एआईएमआईएम के प्रदेश अध्यक्ष ने गुरुवार को साफ कहा कि उनकी पार्टी किसी को समर्थन देने के बजाय खुद अपना उम्मीदवार मैदान में उतारेगी।

दरअसल, इस चुनाव में एआईएमआईएम बड़ी भूमिका में नजर आएगी। इस पार्टी के पांच विधायक हैं। अख्तरुल ईमान गुरुवार को मीडिया से बातचीत करते हुए राज्यसभा चुनाव में समर्थन देने के प्रश्न पर ही भड़क गए।

उन्होंने कहा, "क्या मेरा जन्म समर्थन देने के लिए ही हुआ है? आप लोग यह क्यों नहीं बोलते कि मुझे समर्थन कौन देगा? इन लोगों के राज्यसभा में प्रतिनिधि हैं, राज्यसभा में हमारा कोई नहीं है। राज्यसभा में कई दलों का प्रतिनिधित्व है, लेकिन एआईएमआईएम का कोई सदस्य नहीं है। ऐसे में पार्टी अब अपनी मौजूदगी दर्ज कराना चाहती है।"

अख्तरुल ईमान ने आगे कहा कि जो लोग इस फिरकापरस्त सरकार के खिलाफ लड़ना चाहते हैं, जो लोग दलितों के हित की रक्षा करना चाहते हैं, उन्हें असदुद्दीन ओवैसी के बाजुओं को मजबूत करना चाहिए।

243 सदस्यों वाली बिहार विधानसभा में एक उम्मीदवार को जीतने के लिए 41 विधायकों का समर्थन चाहिए। अभी एनडीए के पास कुल 202 विधायक हैं। इसके आधार पर, एनडीए आसानी से चार सीटें जीत सकता है। चार सीटें जीतने के बाद भी उसके पास कुछ वोट बचे हैं, लेकिन अगर मुकाबला होता है, तो पांचवीं सीट जीतने के लिए उसे अन्य विधायकों की जरूरत पड़ेगी। विपक्षी खेमे में राष्ट्रीय जनता दल की अगुवाई वाला महागठबंधन है।

महागठबंधन के पास कुल 35 विधायक हैं। इसे एक सीट पर जीत दर्ज करने के लिए अन्य विधायकों की जरूरत पड़ेगी। वहीं सांसद असदुद्दीन ओवैसी की ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) के पांच विधायक और बहुजन समाज पार्टी का एक विधायक है जो किसी गठबंधन में नहीं है।
 
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