अयोध्या, 18 फरवरी। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक मोहन भागवत के हालिया बयान पर अयोध्या धाम के साकेत भवन मंदिर के सीताराम दास महंत और सिद्ध पीठ हनुमानगढ़ी के देवेशाचार्य महाराज ने अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने आरएसएस प्रमुख के बयान का समर्थन करते हुए हिंदू समाज से जनसंख्या बढ़ाने और घर वापसी का स्वागत करने की बात कही। साथ ही उन्होंने घुसपैठियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग भी की।
महंत सीताराम दास ने कहा कि मोहन भागवत का बयान बहुत ही सराहनीय है। उन्होंने कहा, "हमारे देश में जो मुसलमान रह रहे हैं, उनमें से 90 प्रतिशत मूलरूप से हिंदू हैं। अगर वे घर वापसी करते हैं तो बहुसंख्यक समाज का फर्ज बनता है कि उनका स्वागत करें और उनकी रक्षा करें।"
उन्होंने आगे कहा कि हिंदू समाज की आबादी लगातार घट रही है। कई जगहों में तो हिंदू अब अल्पसंख्यक हो चुके हैं। उन्होंने कहा, "कट्टरपंथी तत्व जनसंख्या विस्फोट कर हिंदुओं के हक पर कब्जा करने की कोशिश कर रहे हैं। साथ ही हिंदू बहन-बेटियों को बहला-फुसलाकर धर्म परिवर्तन भी करवा रहे हैं।"
उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी से अपील करते हुए कहा, "मैं पीएम मोदी से अपील करता हूं कि ऐसे मामलों में कठोर से कठोर कानून लाए जाएं ताकि हिंदू समाज की रक्षा हो सके। घुसपैठियों को देश में नौकरी देने या उनके समर्थकों को बख्शने के खिलाफ भी सख्त रुख अपनाया जाए और जो लोग रोहिंग्या जैसे घुसपैठियों को लाकर नौकरी दे रहे हैं और देश के लोगों का हक मार रहे हैं, उनके खिलाफ देश निकाला और दंड की कार्रवाई होनी चाहिए।"
इसी के साथ ही, हनुमानगढ़ी के देवेशाचार्य महाराज ने भी मोहन भागवत के बयान को पूरी तरह सही ठहराया। उन्होंने कहा, "कई राज्यों और जिलों में हिंदू पहले ही अल्पसंख्यक हो चुके हैं, जबकि मुसलमान बहुसंख्यक हो गए हैं, इसलिए हिंदुओं को कम से कम तीन बच्चे जरूर करने चाहिए।"
देवेशाचार्य ने बच्चों की संख्या बढ़ाने के साथ उनकी शिक्षा और नौकरी पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा, "सरकार और आरएसएस को हिंदू बच्चों की अच्छी शिक्षा, स्वास्थ्य सुविधा, व्यापार और रोजगार की व्यवस्था भी सुनिश्चित करनी होगी। सिर्फ बच्चे पैदा करने से समस्या हल नहीं होगी।"
देवेशाचार्य ने हालिया रिलीज बजट का जिक्र करते हुए कहा, "हालिया बजट में मुस्लिम बच्चों के लिए कई योजनाएं आईं, लेकिन हिंदू बच्चों के लिए क्या किया गया? भारत सरकार और मोहन भागवत को हिंदू बच्चों के लिए अलग से विशेष योजनाएं बनानी चाहिए। बजट में उनके लिए भी प्रावधान होना चाहिए।"