भारत-स्वीडन की मजबूत डिजिटल साझेदारी: दूरसंचार और नवाचार से भविष्य के नए रास्ते तलाश रहे सिंधिया-बुश

दूरसंचार और डिजिटल इनोवेशन को लेकर भारत और स्वीडन ने की द्विपक्षीय वार्ता


नई दिल्ली, 18 फरवरी। भारत के संचार एवं उत्तर-पूर्वी क्षेत्र विकास मंत्री ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया और स्वीडन की उप प्रधानमंत्री एवं ऊर्जा, व्यापार एवं उद्योग मंत्री एब्बा बुश के बीच 18 फरवरी को नई दिल्ली के संचार भवन में एक द्विपक्षीय बैठक आयोजित की गई।

इस बैठक में दूरसंचार एवं डिजिटल परिवर्तन के क्षेत्र में चल रहे सहयोग की समीक्षा की गई और सहयोग के नए रास्ते तलाशे गए। चर्चाओं में स्वीडन द्वारा स्थिरता, समावेशी उद्यम विकास और सतत वैश्विक जलवायु नेतृत्व पर दिए जाने वाले जोर को भी दर्शाया गया।

दोनों पक्षों ने इस बात की पुष्टि की कि डिजिटल और दूरसंचार सहयोग भारत-स्वीडन रणनीतिक साझेदारी का एक प्रमुख स्तंभ है, जो अगली पीढ़ी की कनेक्टिविटी, सुरक्षित डिजिटल बुनियादी ढांचे, नवाचार-संचालित विकास और स्थिरता में साझा प्राथमिकताओं को दर्शाता है, जिसमें यह सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया कि डिजिटल परिवर्तन समावेशी, आर्थिक रूप से व्यवहार्य और स्वच्छ ऊर्जा संक्रमण के अनुरूप बना रहे।

दोनों पक्षों ने डिजिटल प्रौद्योगिकी और अर्थव्यवस्था पर भारत-स्वीडन संयुक्त कार्य समूह (जेडब्ल्यूजी) को मान्यता दी, जो संरचित नीति और तकनीकी सहयोग के लिए प्रमुख संस्थागत तंत्र के रूप में कार्य करता है। दोनों पक्षों ने कार्यान्वयन-उन्मुख परिणामों को आगे बढ़ाने के लिए स्टॉकहोम में जेडब्ल्यूजी की तीसरी बैठक शीघ्र आयोजित करने की इच्छा व्यक्त की।

चर्चा का मुख्य केंद्र स्वास्थ्य सेवा, कृषि, स्मार्ट शहरों और ग्रामीण कनेक्टिविटी सहित विभिन्न क्षेत्रों में 5जी और 5जी-एडवांस्ड के उपयोग के लिए सहयोग बढ़ाने पर था। स्वीडन के उप प्रधानमंत्री ने उद्यम विकास के साथ स्थिरता को एकीकृत करने के महत्व पर प्रकाश डाला और इस बात पर बल दिया कि जलवायु परिवर्तन से निपटने के उपाय समावेशी, आर्थिक रूप से व्यवहार्य और नवाचार आधारित होने चाहिए।

स्वीडन ने भारत द्वारा विश्व में सबसे तेज 5जी रोल आउट की उपलब्धि की सराहना की और इस बात पर विचार किया कि एरिक्सन जैसी कंपनियों सहित स्वीडन भारत में पहुंच और कनेक्टिविटी को बेहतर बनाने में कैसे योगदान दे सकता है। दोनों पक्षों ने वैश्विक स्तर पर लागू होने योग्य समाधान विकसित करने के लिए स्वीडन के मजबूत अनुसंधान और औद्योगिक नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र को भारत के व्यापक तैनाती और किफायती नवाचार के साथ संयोजित करने की क्षमता को पहचाना, जिसमें वैश्विक दक्षिण के संदर्भ भी शामिल हैं।

सिंधिया ने बताया कि आज भारत में 12.3 अरब से अधिक दूरसंचार ग्राहक और लगभग एक अरब इंटरनेट उपयोगकर्ता हैं, जिनमें चार दूरसंचार ऑपरेटर मुख्य रूप से बाजार-संचालित पारिस्थितिकी तंत्र को सेवाएं प्रदान कर रहे हैं। 4जी कवरेज 98.5 प्रतिशत आबादी तक पहुंच चुका है और जून 2026 तक सभी गांवों में सार्वभौमिक 4जी कवरेज का लक्ष्य रखा गया है। भारत ने विश्व का सबसे तेज 5जी रोलआउट किया है, जो लगभग 5.5 अरब अमेरिकी डॉलर के निवेश के साथ 21 महीनों में पूरा हुआ।

उन्होंने बताया कि विश्व के सबसे बड़े डिजिटल ब्रॉडबैंड नेटवर्क में से एक के तहत प्रत्येक ग्राम पंचायत को जोड़ने के लिए लगभग 16.9 अरब अमेरिकी डॉलर का सार्वजनिक पूंजीगत व्यय किया जा रहा है। स्वदेशी 4जी स्टैक विकसित करने और 93 मिलियन से अधिक ग्राहकों को सेवा प्रदान करने वाले सरकारी ऑपरेटर बीएसएनएल की भूमिका पर भी प्रकाश डाला गया। साथ ही दूरसंचार टावरों में नवीकरणीय ऊर्जा के उपयोग को बढ़ाने और 2030 तक स्वच्छ ऊर्जा परिवर्तन के लक्ष्य सहित स्थिरता उपायों पर भी चर्चा की गई।

क्वांटम संचार, उत्तर-क्वांटम क्रिप्टोग्राफी और सुरक्षित नेटवर्क आर्किटेक्चर जैसे उभरते क्षेत्रों पर भी चर्चा की गई, जो महत्वपूर्ण डिजिटल बुनियादी ढांचे को भविष्य के लिए तैयार करने के लिए एक दूरदर्शी दृष्टिकोण को दर्शाते हैं। साइबर सुरक्षा, दूरसंचार धोखाधड़ी रोकथाम और जोखिम-आधारित नियामक ढांचों पर संरचित सहयोग को प्राथमिकता देने पर चर्चा हुई।
 
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