जनरल द्विवेदी का सफलता मंत्र: भविष्य की चुनौतियों से निपटने में सेनाओं का तालमेल और ढलने की क्षमता अहम

सेनाओं में तालमेल और चुनौतियों के अनुसार ढलने की क्षमता अहम: जनरल उपेंद्र द्विवेदी


नई दिल्ली, 18 फरवरी। भारतीय थलसेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने सेना के विभिन्न अंगों के बीच तालमेल, परिस्थितियों (चुनौतियों) के अनुसार ढलने की क्षमता और पेशेवर सैन्य शिक्षा की अहमियत पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि भविष्य की चुनौतियों का सामना करने के लिए दूरदर्शी और सक्षम सैन्य नेतृत्व तैयार करना समय की मांग है।

बता दें कि भारतीय थल सेनाध्यक्ष ऑस्ट्रेलिया के दौरे पर हैं। उन्होंने ऑस्ट्रेलिया के वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों के साथ ये बातें कहीं। उन्होंने आस्ट्रेलियन डिफेंस कॉलेज का दौरा किया है। यहां उनकी मुलाकात कॉलेज के कमांडर मेजर जनरल मार्टिन व्हाइट और आस्ट्रेलियन वॉर कॉलेज की कमांडेंट ब्रिगेडियर लारा ट्रॉय से हुई। इस दौरान सैन्य शिक्षा, नेतृत्व विकास और रणनीतिक सहयोग जैसे मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई। दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग को नई गति देने के लिए वह यहां कई महत्वपूर्ण बैठकों में हिस्सा ले रहे हैं।

भारतीय सेना के मुताबिक, जनरल द्विवेदी ने आस्ट्रेलियन कमांड एंड स्टाफ कॉलेज के प्राध्यापकों और प्रशिक्षण ले रहे अधिकारियों को संबोधित किया। उन्होंने बदलते वैश्विक सुरक्षा परिदृश्य, उभरती रणनीतिक चुनौतियों और सशस्त्र सेनाओं की विकसित होती भूमिका पर अपने विचार साझा किए। उन्होंने अपने संबोधन में सेनाओं के बीच तालमेल, परिस्थितियों के अनुसार ढलने की क्षमता और पेशेवर सैन्य शिक्षा की अहमियत पर जोर दिया।

उन्होंने कहा कि भविष्य की चुनौतियों का सामना करने के लिए दूरदर्शी और सक्षम सैन्य नेतृत्व तैयार करना समय की मांग है। इससे पहले उन्होंने स्पेशल ऑपरेशंस कमांड ऑस्ट्रेलिया के मुख्यालय का भी दौरा किया। वहां उन्हें ऑस्ट्रेलियाई विशेष बलों की क्षमताओं, संयुक्त प्रशिक्षण व्यवस्था और अभियान तैयारियों की विस्तृत जानकारी दी गई। दोनों देशों के सैन्य अधिकारियों ने द्विपक्षीय सहयोग को और मजबूत करने तथा संयुक्त अभ्यासों को बढ़ाने के अवसरों पर चर्चा की।

ऑस्ट्रेलिया यात्रा के दौरान जनरल द्विवेदी ने फोर्स कमांड और सेकेंड डिविजन के मुख्यालय का भी दौरा किया। यहां प्रशिक्षण सहयोग को सशक्त बनाने, आपसी संचालन क्षमता बढ़ाने और उभरती व विशिष्ट प्रौद्योगिकियों के क्षेत्र में नए सहयोगी आयाम तलाशने पर विचार-विमर्श हुआ। विस्तृत प्रस्तुतियों और पेशेवर संवादों ने दोनों सेनाओं की साझा कार्य संस्कृति और भविष्य उन्मुख सोच को उजागर किया।

रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि यह दौरा भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच मजबूत होते रक्षा संबंधों का प्रतीक बना है। दोनों देशों ने सैन्य स्तर पर सहयोग को और गहरा करने तथा क्षेत्रीय और वैश्विक चुनौतियों से मिलकर निपटने की प्रतिबद्धता दोहराई है। सेना प्रमुख की यह आधिकारिक यात्रा 16 फरवरी को प्रारंभ हुई थी और 19 फरवरी तक जारी रहेगी। इस दौरान वह ऑस्ट्रेलिया के रक्षा बलों के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ अलग-अलग महत्वपूर्ण वार्ताओं में हिस्सा ले रहे हैं।
 
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