डीके शिवकुमार की भाजपा को कड़ी चेतावनी: कचरे पर राजनीति बंद करो, वरना घरों के बाहर डंप होगा कूड़ा!

D.K. Shivakumar


बेंगलुरु, 18 फरवरी। कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने बुधवार को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के विधायकों पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि कुछ भाजपा विधायक अपने-अपने विधानसभा क्षेत्रों में तय स्थानों पर कचरा डंप करने से रोक रहे हैं और इस मुद्दे को लेकर सरकार को ब्लैकमेल करने की कोशिश कर रहे हैं।

उन्होंने बेंगलुरु में पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा कि शहर में कचरा निपटान की व्यवस्था को बाधित करना ठीक नहीं है। कुछ विधायक यह कह रहे हैं कि उनके क्षेत्रों में कचरा नहीं डाला जाए। यहां तक कि बदले में विकास निधि और अन्य लाभों की मांग कर रहे हैं। यदि इस तरह की गतिविधियां जारी रहीं तो सरकार को आवश्यक सेवाएं बनाए रखने के लिए सख्त कदम उठाने पड़ेंगे।

उन्होंने कहा कि अगर कोई भी जनप्रतिनिधि कचरा उठाने वाली गाड़ियों को रोकेगा तो सरकार मजबूर होकर कचरा संबंधित नेताओं के घरों या पार्टी कार्यालयों के सामने डंप कर सकती है।

उन्होंने आरोप लगाया कि हाल ही में भाजपा नेता अरविंद लिंबावली और डोड्डाबल्लापुर के विधायक धीरज मुनिराजू ने भी कचरा डंपिंग का विरोध किया। शिवकुमार ने कहा कि कचरे को कहीं न कहीं तो डालना ही होगा और सरकार वही प्रक्रिया अपना रही है, जो पहले से चलती आ रही है।

उन्होंने यह भी कहा कि यदि आवश्यक हुआ तो आवश्यक सेवा अनुरक्षण अधिनियम के तहत कार्रवाई की जाएगी, क्योंकि कचरा प्रबंधन एक जरूरी नागरिक सेवा है और इसे रोका नहीं जा सकता। शहर की स्वच्छता और सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़े मामलों में राजनीति नहीं होनी चाहिए। सरकार किसी भी तरह के दबाव में नहीं आएगी और शहर की आवश्यक सेवाएं हर हाल में जारी रहेंगी।

उन्होंने कहा कि वे मानते हैं कि कुछ गलतियां हुई होंगी। अगर किसी दुर्घटना में लापरवाही पाई जाती है, तो कानूनी कार्रवाई की जाएगी। हादसे नहीं होने चाहिए थे। यदि ऐसा हुआ है, तो जिम्मेदारी तय की जाएगी। डिप्टी सीएम ने साफ किया कि दुर्घटनाओं के कारण ट्रकों को रोक देना समाधान नहीं है, क्योंकि शहर की स्वच्छता व्यवस्था बनाए रखना जरूरी है। अगले दिन सुबह से कचरा ट्रकों को बेंगलुरु में विधायक एस.टी. सोमशेखर और मंत्री कृष्णा बायरे गौड़ा के निर्वाचन क्षेत्रों में स्थित डंपिंग स्थलों पर भेजा जाएगा।

उन्होंने कहा कि यह कोई नई व्यवस्था नहीं है, पहले भी इसी तरह कचरा निपटान किया जाता रहा है। सरकार ने कचरा डंपिंग के लिए दो स्थान खरीदे हैं और नियमों के अनुसार निविदाएं जारी की हैं। उन्होंने स्वीकार किया कि कुछ कानूनी अड़चनें हैं, लेकिन उन्हें दूर करने की प्रक्रिया चल रही है।
 

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