इंग्लैंड में फंसा माल्या! 'भारत नहीं लौट सकता', बॉम्बे हाईकोर्ट में भगोड़ा आर्थिक अपराधी टैग को दी चुनौती

विजय माल्या ने इंग्लैंड से वापसी में जताई 'असमर्थता', बॉम्बे हाईकोर्ट ने सॉलिसिटर जनरल को दिया जवाब दाखिल करने का निर्देश


मुंबई, 18 फरवरी। बॉम्बे हाईकोर्ट में मंगलवार को विजय माल्या से जुड़ी दो अहम याचिकाओं पर सुनवाई हुई। इस दौरान माल्या के वकील ने अदालत को बताया कि वह यह स्पष्ट नहीं कर सकते कि भारत कब लौट पाएंगे, क्योंकि इंग्लैंड की अदालतों ने उनके देश छोड़ने पर रोक लगा रखी है।

मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश चंद्रशेखर और न्यायमूर्ति गौतम अनखड़ की खंडपीठ के समक्ष हुई। माल्या की ओर से दायर याचिकाओं में उन्हें “फ्यूजिटिव इकोनॉमिक ऑफेंडर” घोषित किए जाने को चुनौती दी गई। साथ ही उस आदेश को भी चुनौती दी गई है जिसमें उन्हें भगोड़ा आर्थिक अपराधी घोषित किया गया था।

माल्या की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता अमित देसाई ने दलील दी कि सुप्रीम कोर्ट के कई फैसलों में याचिकाएं याचिकाकर्ता की गैरहाजिरी में भी सुनी गई हैं। उन्होंने कहा कि उनके मुवक्किल के खिलाफ प्रत्यर्पण की कार्यवाही इंग्लैंड में जारी है और अदालत के आदेश के कारण वह बाहर नहीं जा सकते।

हालांकि, मुख्य न्यायाधीश ने माल्या की अदालत में पेश होने की मंशा पर सवाल उठाए। पीठ ने कहा कि माल्या इंग्लैंड की अदालत के आदेशों का हवाला दे रहे हैं, लेकिन यह स्पष्ट नहीं किया गया कि उन्होंने उन आदेशों को चुनौती दी है या नहीं। अदालत ने इसे एक बहाने के रूप में देखा।

सुनवाई के दौरान अदालत ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता को निर्देश दिया कि वे माल्या के हलफनामे पर जवाब दाखिल करें। पीठ ने यह भी कहा कि अदालत में आज जो बयान दिए गए हैं, उन्हें शपथपत्र के रूप में दाखिल किया जाए ताकि उन्हें रिकॉर्ड पर लिया जा सके और केंद्र सरकार भी उस पर अपना जवाब दाखिल कर सके।

खंडपीठ ने आगे की कार्यवाही के लिए तीन सप्ताह का समय दिया। अदालत ने यह भी टिप्पणी की कि ये याचिकाएं वर्ष 2019 से लंबित हैं और याचिकाकर्ता की ओर से इनके शीघ्र निपटारे के लिए गंभीर प्रयास नहीं किए गए हैं। मामले की अगली सुनवाई 11 मार्च को निर्धारित की गई है।
 

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