गुवाहाटी, 17 फरवरी। असम में वरिष्ठ नेता और पूर्व एपीसीसी अध्यक्ष भूपेन कुमार बोरा ने कांग्रेस पार्टी छोड़ने का ऐलान कर दिया है। इसे कांग्रेस के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।
मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने कहा कि वरिष्ठ नेता और पूर्व एपीसीसी अध्यक्ष भूपेन कुमार बोरा के कांग्रेस छोड़ने से आगामी चुनावों से पहले विपक्षी पार्टी की शक्ति कमजोर होगी।
सरमा ने मंगलवार को औपचारिक रूप से घोषणा की कि बोरा 22 फरवरी को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल होंगे और इसे असम की राजनीतिक तस्वीर में एक मोड़ बताया।
भूपेन बोरा के आवास पर मुख्यमंत्री ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि कांग्रेस में लगभग तीन दशकों तक रहने और राज्य अध्यक्ष बनने वाले नेता का पार्टी छोड़ना गहरी अंतर्निहित समस्याओं को दर्शाता है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि वह बुधवार को भूपेन बोरा के साथ एक और गहन राजनीतिक चर्चा करेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि बोरा को भाजपा एजेंट बताने वाले आरोप पूरी तरह निराधार और राजनीतिक रूप से प्रेरित हैं।
उन्होंने जोर दिया कि बोरा जैसे पद और प्रतिष्ठा वाले नेता बिना गंभीर कारण के इस्तीफा नहीं देते, खासकर जब उन्होंने संगठनात्मक जिम्मेदारियां निभाई हों।
सरमा ने कांग्रेस उच्च कमान के बोरा की शिकायतों के निपटारे पर सवाल उठाते हुए कहा कि उनकी समस्याओं को संवेदनशीलता के साथ नहीं सुना गया।
बिना किसी विशेष व्यक्ति का नाम लिए उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस के कुछ नेता जमींदारों की तरह काम करते हैं, जो जमीनी हकीकत से कटे हुए हैं और जवाबदेही स्वीकार करने को तैयार नहीं हैं।
उन्होंने कहा कि ऐसी आंतरिक संस्कृति ने बार-बार समर्पित नेताओं को किनारे कर दिया, अंततः उन्हें छोड़ने के लिए मजबूर किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि बोरा के पार्टी छोड़ने से कांग्रेस की विश्वसनीयता और मनोबल पर गहरा असर पड़ेगा, क्योंकि उनका संगठन में महत्वपूर्ण प्रभाव है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भाजपा का उद्देश्य कांग्रेस-मुक्त राज्य बनाना नहीं है, बल्कि राज्य में मजबूत और स्थिर राजनीतिक विकल्प प्रदान करना है।