गुजरात के बनासकांठा में 'ब्लैक ट्रैप' खदानों पर मंत्री का बड़ा बयान: 76 पट्टे सक्रिय, कोई काली खदान नहीं

गुजरात के बनासकांठा में कोई ब्लैक ट्रैप खदान नहीं, 76 खनन पट्टे चालू हैं: मंत्री ऋषिकेश पटेल


गांधीनगर, 17 फरवरी। गुजरात के ऊर्जा एवं पेट्रोकेमिकल मंत्री ऋषिकेश पटेल ने मंगलवार को गुजरात विधानसभा में स्पष्ट किया कि बनासकांठा जिले के दांता तालुका के भेमल और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में कोई ब्लैक ट्रैप खदान संचालित नहीं हो रही है।

ऋषिकेश पटेल ने कहा कि इस क्षेत्र में भवन निर्माण के लिए पत्थर और ग्रेनाइट के कई खनन पट्टे जरूर हैं, लेकिन काले खनिज पदार्थों की कोई अलग खदान नहीं है।

मंत्री ने बताया कि संबंधित ग्रामीण इलाकों में कुल 107 खनन पट्टे हैं, जिनमें से 76 वर्तमान में चालू हैं, जबकि 31 पट्टों को एनी टाइम रॉयल्टी (एटीआर) प्रणाली के तहत बंद कर दिया गया है। विशेष रूप से दांता तालुका में दो ग्रेनाइट और 74 भवन निर्माण पत्थर के पट्टे सक्रिय हैं, जिससे कुल सक्रिय पट्टों की संख्या 76 हो जाती है।

पटेल ने विस्तार से जानकारी देते हुए कहा कि आवश्यक खनन योजना प्रस्तुत नहीं करने के कारण एक ग्रेनाइट पट्टा निलंबित किया गया है। बकाया रॉयल्टी भुगतान न होने की वजह से पांच भवन निर्माण पत्थर के पट्टे बंद किए गए। इसके अतिरिक्त, भवन निर्माण पत्थर के दो पट्टे बलराम-अंबाजी वन्यजीव अभ्यारण्य से एक किलोमीटर के दायरे में स्थित हैं। 16 पट्टाधारकों ने राज्य स्तरीय पर्यावरण मंजूरी (ईसी) प्रस्तुत नहीं की, छह ने ईसी के लिए आवेदन ही नहीं किया और एक की पर्यावरण मंजूरी अस्वीकृत कर दी गई। इन सभी कारणों से कुल 31 पट्टों को बंद किया गया है।

मंत्री ने ब्लैक ट्रैप और भवन निर्माण पत्थर के बीच अंतर भी स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि ब्लैक ट्रैप बेसाल्ट का एक प्रकार है, जो पृथ्वी के मेंटल से निकलने वाले लावा के प्राकृतिक रूप से ठंडा होकर जमने से बनता है। यह गहरे काले या भूरे रंग का, अत्यंत कठोर और सघन पत्थर होता है, जो उच्च दबाव सहन करने में सक्षम है। इसका प्रत्यक्ष उपयोग सीमित है, लेकिन इसे पीसकर एग्रीगेट के रूप में निर्माण कार्यों में व्यापक रूप से इस्तेमाल किया जाता है।

उन्होंने बताया कि ब्लैक ट्रैप से बने एग्रीगेट का उपयोग स्लैब, बीम और स्तंभों के लिए प्रबलित कंक्रीट में, सड़क निर्माण की आधार और सतह परतों में, रेलवे गिट्टी के रूप में तथा बांध, पुल और बंदरगाह जैसी भारी अवसंरचना परियोजनाओं में किया जाता है। इसके विपरीत, भवन निर्माण में उपयोग होने वाले पत्थर प्राकृतिक चट्टानों से प्राप्त होते हैं और घरों, सड़कों तथा अन्य संरचनाओं के निर्माण में प्रयुक्त होते हैं। प्रशासनिक स्पष्टता के लिए गुजरात के लघु खनिज रियायत नियमों के तहत इन पत्थरों को उनकी भूवैज्ञानिक संरचना और उपयोग के आधार पर अलग-अलग वर्गीकृत किया गया है।

मंत्री ऋषिकेश पटेल ने जोर देकर कहा कि क्षेत्र के सभी खनन पट्टों की कड़ी निगरानी की जाती है। एटीआर प्रणाली, पर्यावरण मंजूरी अनुपालन और अन्य प्रशासनिक उपायों के माध्यम से भेमल तथा आसपास के क्षेत्रों में खनिजों के वैध और टिकाऊ निष्कर्षण को सुनिश्चित किया जा रहा है।
 
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