कोलकाता: 20 करोड़ का स्कूल फंड घोटाला! ट्रस्टी कृष्ण दमानी ने परिवार-कंपनियों में किया पैसों का बंदरबांट

कोलकाता ईडी जांच: ट्रस्टी कृष्ण दमानी ने स्कूल फंड का दुरुपयोग कर परिवार और कंपनियों में 20 करोड़ से अधिक राशि ट्रांसफर की


कोलकाता, 17 फरवरी। कोलकाता जोनल ऑफिस, डायरेक्टरेट ऑफ एनफोर्समेंट (ईडी) ने 11 फरवरी 2026 को प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए), 2002 के तहत चीफ जज, सिटी सेशन कोर्ट, कोलकाता के समक्ष कृष्ण दमानी के खिलाफ प्रॉसिक्यूशन कंप्लेंट (पीसी) दाखिल की है।

स्पेशल कोर्ट ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) 2023 की धारा 223(1) के तहत आरोपी को नोटिस जारी किया है। यह मामला मेसर्स साउथ पॉइंट एजुकेशन सोसाइटी (एसपीईएस) के फंड की हेराफेरी से जुड़ा है, जिसकी शुरुआत कोलकाता पुलिस द्वारा दर्ज एफआईआर से हुई थी। ईडी ने इसी आधार पर जांच शुरू की, जिसमें बड़े पैमाने पर फंड डायवर्शन का खुलासा हुआ।

जांच में सामने आया कि एसपीईएस के ट्रस्टी कृष्ण दमानी ने अन्य सदस्यों को किनारे करके बोर्ड ऑफ ट्रस्टीज पर पूरा कंट्रोल हासिल कर लिया। गवर्नेंस पर दबदबा बनने के बाद उन्होंने अपने पद का दुरुपयोग कर स्कूल के भारी-भरकम फंड को अपने और परिवार के सदस्यों की मालिकी वाली कंपनियों में ट्रांसफर कर दिया।

कुल 20 करोड़ रुपए से अधिक की राशि मैनपावर सर्विस और अन्य सेवाओं की आड़ में डायवर्ट की गई। जांच में पाया गया कि पेमेंट नकली वाउचर, फर्जी इनवॉइस और नकली कर्मचारी रिकॉर्ड के जरिए किए गए। इसमें ऐसे स्टाफ की सैलरी शामिल थी जो कभी मौजूद ही नहीं थे, जबकि सोसाइटी/स्कूल के अकाउंट से दमानी के निजी कर्मचारियों को भुगतान किया गया।

ईडी के अनुसार, दमानी ने स्कूल फंड का दुरुपयोग एलीट क्लब मेंबरशिप फीस, निजी खर्चों और लॉकडाउन पीरियड की सैलरी के लिए भी किया, यहां तक कि ऐसी सेवाओं के लिए भी पेमेंट किया गया जो कभी प्रदान ही नहीं की गईं। क्राइम से प्राप्त धन को उन्होंने परिवार के सदस्यों (पत्नी, मां, बेटियां) और कंट्रोल वाली कंपनियों में बढ़ा-चढ़ाकर सैलरी, डायरेक्टर फीस, कमीशन आदि के रूप में बांटा। इसके बाद इसे म्यूचुअल फंड और अन्य निवेशों में लगाकर लेयरिंग की गई, जिससे मनी लॉन्ड्रिंग का जाल बुना गया।

यह मामला 2024 से चल रही जांच का हिस्सा है, जब कोलकाता पुलिस ने फरवरी 2024 में दमानी को गिरफ्तार किया था। आरोपों में 30 करोड़ से अधिक की हेराफेरी शामिल थी, जिसमें रिश्तेदारों की कंपनियों (जैसे ग्लोबल स्टाफिंग सर्विसेज और पास्टिल मर्केंटाइल) के जरिए फंड ट्रांसफर किया गया। ईडी ने सितंबर 2024 में भी सर्च ऑपरेशन किए थे। दमानी को पहले पुलिस कस्टडी में भेजा गया था, लेकिन बाद में जमानत मिल गई।

ईडी की जांच से चैरिटेबल संस्था के फंड को निजी फायदे के लिए इस्तेमाल करने का गंभीर मामला उजागर हुआ है। आगे की जांच जारी है, जिसमें और सबूत जुटाए जा रहे हैं। ईडी का दावा है कि जांच पूरी होने पर और आरोपी सामने आ सकते हैं।
 
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