सिद्धू की पत्नी के बयान पर पूनावाला का वार: राहुल गांधी पर किसी को भरोसा नहीं, कांग्रेस में मची भगदड़

नवजोत कौर सिद्धू के बयान पर शहजाद पूनावाला बोले, राहुल गांधी पर किसी को भरोसा नहीं


पुणे, 17 फरवरी। पूर्व कांग्रेस नेता नवजोत कौर सिद्धू ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पर आरोप लगाते हुए कहा है कि उनके पास किसी को सुनने के लिए वक्त नहीं है। पूर्व कांग्रेसी नेता के बयान पर भाजपा प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने कहा कि राहुल गांधी पर किसी को भरोसा नहीं बचा है।

पुणे में आईएएनएस से बातचीत में भाजपा प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने कहा कि हाल ही में कांग्रेस नेता मणिशंकर अय्यर ने राहुल गांधी पर नो-कॉन्फिडेंस मोशन पारित किया है। असम में भी कांग्रेस के कई बड़े नेता पार्टी छोड़कर जाने की तैयारी में हैं। इंडी अलायंस की कमान ममता बनर्जी को सौंपने की कवायद तेज हो गई है। टीएमसी के अलावा कई अन्य विपक्षी दल भी यही बात बोल रहे हैं, राहुल गांधी में वह बात नहीं है। नवजोत कौर सिद्धू, जिनके पति आज भी कांग्रेस में हैं, कह रही हैं कि राहुल गांधी किसी की नहीं सुनते, किसी से मिलते नहीं और समय नहीं देते। पंजाब में कांग्रेस बर्बाद हो रही है, वे फीडबैक नहीं लेते। राहुल गांधी पर किसी का भरोसा नहीं बचा है। उनके पास न तो जनमत है और न ही संगठन, बल्कि कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं का भी राहुल गांधी से मोहभंग हो चुका है।

तमिलनाडु का जिक्र करते हुए भाजपा प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने कहा कि एक तरफ एनडीए गठबंधन है, जो एक 'मजबूत गठबंधन' है और लगातार बढ़ रहा है, क्योंकि तमिलनाडु के लिए इसका एक साफ मिशन और विजन है। दूसरी तरफ डीएमके-कांग्रेस गठबंधन एक 'मजबूर गठबंधन' है। इसमें कोई मिशन या विजन नहीं है और यह सिर्फ कन्फ्यूजन, सत्ता की चाहत और अंदरूनी फूट से चलता है।

मणिकम टैगोर जैसे कांग्रेस नेता पावर शेयरिंग और ज्यादा सीटों की मांग कर रहे हैं। यह सब सत्ता पाने के लिए है। इस बीच स्टालिन ने कहा है कि इस बार तमिलनाडु में कोई पावर शेयरिंग या ऐसा कोई अरेंजमेंट नहीं होगा।

पूर्व कांग्रेस नेता नवजोत कौर सिद्धू ने कहा था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बहुत आध्यात्मिक हैं और यह उनके व्यक्तित्व में झलकता है। जहां तक राहुल गांधी की बात है, मैं उन्हें समझ नहीं पाती, क्योंकि वह अभी उस स्तर पर नहीं पहुंचे हैं जहां वे सभी के साथ समान व्यवहार करें और बातचीत के लिए खुले रहें। वे अभी भी गांधी परिवार की मानसिकता से बंधे हुए लगते हैं, जहां उनके पास उन लोगों को सुनने का समय नहीं है जो वास्तव में उनके शुभचिंतक हैं और उन्हें मार्गदर्शन देने की कोशिश कर रहे हैं। अगर किसी से मिलने में आठ महीने लग जाते हैं, तो मुझे लगता है कि यह सही नहीं है। एक नेता को हर किसी से मिलना चाहिए, खासकर उनसे जो ईमानदार हों और रचनात्मक सलाह दे रहे हों। अगर आप इसे सुनने के लिए तैयार नहीं हैं, तो यह आपकी मर्जी है।
 

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