नोएडा, 16 फरवरी। शहर की सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में एक और बड़ा कदम उठाया जा रहा है। नोएडा के सेक्टर-61 से ग्रेटर नोएडा वेस्ट तक मेट्रो लाइन का विस्तार प्रस्तावित है।
करीब 6 किलोमीटर लंबे इस कॉरिडोर में चार नए स्टेशन बनाए जाएंगे और यह लाइन क्षेत्रीय रैपिड ट्रांजिट सिस्टम (आरआरटीएस) से भी जुड़ेगी। इस परियोजना से प्रतिदिन लगभग 1.25 लाख यात्रियों को लाभ मिलने का अनुमान है।
प्रस्तावित रूट के तहत सेक्टर-61 को कॉमन स्टेशन के रूप में विकसित किया जाएगा, जहां दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (डीएमआरसी) और नोएडा मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (एनएमआरसी) का संयुक्त जंक्शन होगा। इसे इंटरचेंज स्टेशन की तर्ज पर तैयार किया जाएगा, ताकि यात्रियों को लाइन बदलने में आसानी हो। सेक्टर-61 से आगे बढ़ते हुए यह मेट्रो ग्रेटर नोएडा वेस्ट के सेक्टर-4 तक जाएगी, जहां आरआरटीएस स्टेशन से इसका सीधा संपर्क होगा।
अधिकारियों के मुताबिक, आरआरटीएस कॉरिडोर सराय काले खां से शुरू होकर ग्रेटर नोएडा वेस्ट के सेक्टर-4 और नॉलेज पार्क-5 तक पहुंचेगा। नॉलेज पार्क-5 पर प्रस्तावित गाजियाबाद आरआरटीएस से कनेक्टिविटी मिलेगी। इससे जेवर एयरपोर्ट तक पहुंचना भी आसान हो जाएगा। दिल्ली मेट्रो से सेक्टर-61 तक आने वाले यात्री यहां से एनएमआरसी की मेट्रो पकड़कर सीधे ग्रेटर नोएडा वेस्ट जा सकेंगे, जबकि जेवर जाने वाले यात्री आरआरटीएस का उपयोग कर सकेंगे।
इस रूट की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार है। कुछ संशोधन के बाद इसे दोबारा उत्तर प्रदेश कैबिनेट के पास मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। अधिकारियों को उम्मीद है कि जल्द ही इसे स्वीकृति मिल जाएगी।
एनएमआरसी के सीईओ कृष्णा करुणेश ने बताया कि इस परियोजना से ग्रेटर नोएडा वेस्ट, गौड़ चौक और नोएडा के बीच रोजाना लगने वाले जाम से राहत मिलेगी। लोगों को बेहतर और सुलभ सार्वजनिक परिवहन का विकल्प मिलेगा, जिससे निजी वाहनों पर निर्भरता भी कम होगी। करीब 6 किलोमीटर लंबे इस एलिवेटेड कॉरिडोर में सेक्टर-61, सेक्टर-70, सेक्टर-123 और ग्रेटर नोएडा वेस्ट सेक्टर-4 स्टेशन शामिल होंगे।
उन्होंने बताया कि परियोजना की लागत को कम रखने के लिए केंद्र सरकार, राज्य सरकार, नोएडा और ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण संयुक्त रूप से इक्विटी के आधार पर निवेश करेंगे। इसके अलावा ग्रेटर नोएडा डिपो से जुनपत और बॉटेनिकल गार्डन से सेक्टर-142 तक के रूट की डीपीआर को केंद्र सरकार पहले ही मंजूरी दे चुकी है।
इन परियोजनाओं की डिटेल्ड डिजाइनिंग, टोपोग्राफी सर्वे और सॉइल टेस्टिंग का कार्य लगभग पूरा हो चुका है। संभावना है कि दोनों परियोजनाओं का शिलान्यास एक साथ अगले महीने किया जाएगा।