नई दिल्ली, 16 फरवरी। दिल्ली विश्वविद्यालय में यूजीसी के समर्थन में एक प्रदर्शन को कवर करते समय एक महिला सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर पर हुए हमले को लेकर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने नोटिस जारी किया है।
नोटिस में कहा गया है कि मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग को देश में सभी लोगों के अधिकारों की रक्षा और संवर्धन करने की जिम्मेदारी दी है और इसे नागरिक न्यायालय के समान जांच करने के अधिकार भी प्रदान किए हैं।
नोटिस में आगे लिखा गया है कि शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि 13 फरवरी को दिल्ली विश्वविद्यालय के नॉर्थ कैंपस में यूजीसी के समर्थन में एक प्रदर्शन को कवर करते समय एक महिला पत्रकार और कंटेंट क्रिएटर पर भीड़ ने हिंसक हमला किया।
शिकायतकर्ता ने कहा कि हमलावरों ने उन्हें उनकी जाति के आधार पर निशाना बनाया। उन्हें मौखिक रूप से अपमानित किया। शारीरिक रूप से हमला किया। हिंसा की धमकी दी और उनकी मर्यादा को चोट पहुंचाने का प्रयास किया।
शिकायतकर्ता ने बताया कि यह घटना जातिवादी हिंसा, प्रेस की स्वतंत्रता पर हमला और उनके जीवन, सम्मान और व्यक्तिगत सुरक्षा के मौलिक अधिकारों का गंभीर उल्लंघन है। उन्होंने आयोग से मामले में हस्तक्षेप करने और आरोपियों के खिलाफ निष्पक्ष जांच और उचित कार्रवाई करने का अनुरोध किया। प्राथमिक जांच के अनुसार, शिकायत में किए गए आरोप मानवाधिकारों के उल्लंघन से संबंधित प्रतीत होते हैं।
नोटिस में कहा गया है कि आयोग के सदस्य प्रियंक कानूनगो की अध्यक्षता में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की पीठ ने इस मामले में धारा 12 के तहत कार्रवाई करने का संज्ञान लिया है। आयोग के निर्देशानुसार, रजिस्ट्री को यह निर्देश दिया गया है कि उत्तर दिल्ली के डीसीपी और दिल्ली विश्वविद्यालय के कुलपति को नोटिस जारी किया जाए और शिकायत में किए गए आरोपों की जांच करवाई जाए। जांच पूरी होने के बाद दो हफ्तों के भीतर कार्रवाई की रिपोर्ट आयोग को प्रस्तुत की जाए।
इससे पहले राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के सदस्य प्रियंक कानूनगो ने कहा था कि महिलाओं का अपमान कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर उन्होंने लिखा था कि दिल्ली विश्वविद्यालय में महिला पत्रकार के साथ हिंसक दुर्व्यवहार की शिकायत मिली है। हम संज्ञान ले रहे हैं, गुंडों का विधिसम्मत इलाज किया जाएगा।