जूही चावला और तनीषा मुखर्जी ने बताया जीवन बदलने का मंत्र, ध्यान-साधना को बताया असली ताकत

जूही चावला और तनीषा मुखर्जी ने साझा किया आध्यात्मिक अनुभव, ध्यान और साधना को बताया जीवन की ताकत


कोयंबटूर, 16 फरवरी। तमिलनाडु के कोयंबटूर स्थित ईशा योग केंद्र में महाशिवरात्रि का पर्व इस बार भव्यता के साथ मनाया गया। इस अवसर पर राजनीति क्षेत्र के अलावा, फिल्म जगत से जुड़ी कई जानी-मानी हस्तियां भी कार्यक्रम में शामिल हुईं। इस कड़ी में आंध्र प्रदेश भाजपा अध्यक्ष पीवीएन माधव, नवजोत कौर सिद्धू, अभिनेत्री जूही चावला और तनीषा मुखर्जी समेत कई विशिष्ट अतिथि मौजूद रहे।

आईएएनएस से बात करते हुए अभिनेत्री जूही चावला ने महाशिवरात्रि समारोह में शामिल होने के अपने अनुभव को बेहद खास बताया।

उन्होंने कहा, "मैं पिछले दस सालों से सद्गुरु के मार्गदर्शन से जुड़ी हुई हूं और समय-समय पर ईशा के कार्यक्रमों में आती रही हूं। मुझे सद्गुरु के साथ संवाद कार्यक्रम करने का सौभाग्य मिला, साथ ही काशी यात्रा के दौरान भी उनके साथ अनुभव साझा करने का अवसर मिला। हर बार जब मैं ईशा केंद्र आती हूं, तो यहां का माहौल पहले से अधिक विशाल, व्यवस्थित और प्रभावशाली नजर आता है।''

जूही चावला ने आगे कहा, ''महाशिवरात्रि का मंच, सजावट और सांस्कृतिक प्रस्तुतियां हर साल और भी भव्य होती जा रही हैं। पहले लोग इस आयोजन को समझने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन अब महाशिवरात्रि एक पहचान बन चुकी है। यहां तक कि हवाई अड्डे पर भी लोग एक-दूसरे से पूछते नजर आते हैं कि क्या वे महाशिवरात्रि के लिए आए हैं। ईशा आश्रम का यह बड़ा आयोजन लोगों को बार-बार यहां खींच लाता है।''

अभिनेत्री तनीषा मुखर्जी ने भी आईएएनएस से बात करते हुए मेडिटेशन और आध्यात्मिकता को मानसिक स्वास्थ्य के लिए बेहद जरूरी बताया। उन्होंने कहा, ''मेडिटेशन मेरे जीवन में बदलाव लेकर आया है। पहले मेरे भीतर गुस्सा बहुत ज्यादा था और मैं गुस्से में सही तरीके से सोच नहीं पाती थीं। अब, मैं मेडिटेशन के अभ्यास से अपने गुस्से को समझ पाती हूं और यह सोच सकती हूं कि किसी बात पर गुस्सा करना सही है या नहीं।''

तनीषा मुखर्जी ने कहा, ''हर इंसान के भीतर आलस होता है और हम अक्सर आज का काम कल पर टाल देते हैं। लेकिन जब मैं मेडिटेशन में खुद को स्थिर करती हूं, तो मेरे भीतर सक्रिय रहने की प्रेरणा अपने आप जागती है।''

उन्होंने जोर देते हुए कहा, ''सही मानसिक स्वास्थ्य के लिए आध्यात्मिकता को अपनाना और प्रार्थना करना बेहद जरूरी है। इससे मन शांत होता है और जीवन के प्रति नजरिया सकारात्मक बनता है। जब इंसान खुद को खोया हुआ महसूस करता है, तब उसे कुछ समय अपने साथ बैठकर अपने भीतर झांकना चाहिए, खुद से सवाल पूछने चाहिए। ऐसा करने से मन को गहरा सुकून और राहत मिलती है। ईशा फाउंडेशन का वातावरण इस आत्ममंथन के लिए सबसे उपयुक्त है।''
 

Latest Replies

Trending Content

Forum statistics

Threads
7,598
Messages
7,630
Members
18
Latest member
neodermatologist
Back
Top