रायपुर, 15 फरवरी। छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी जिले के विकासखंड मोहला के ग्राम मोहभट्टा से खेती की एक सकारात्मक और प्रेरणादायक तस्वीर सामने आई है। केंद्र सरकार की राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक समर्थित 'नाबार्ड सौर सुजला योजना' के तहत सोलर सिंचाई पंप लगने से यहां के किसान आधुनिक और वैज्ञानिक पद्धति अपनाकर बेहतर मुनाफा कमा रहे हैं।
ग्राम मोहभट्टा के किसान चिंताराम नायक के पास लगभग सात एकड़ कृषि भूमि है। वे रबी के मौसम में धान की फसल लेने के बाद खरीफ मौसम में मक्का, सरसों, मूंग और उड़द सहित अन्य फसलों का उत्पादन करते हैं। किसान का कहना है कि फसल चक्र अपनाने से न केवल जल संरक्षण होता है, बल्कि मिट्टी की उर्वरता भी बनी रहती है। इससे पैदावार बढ़ती है और उत्पादन की गुणवत्ता भी बेहतर होती है।
चिंताराम नायक ने आईएएनएस से बताया कि वे रबी और गर्मी के मौसम में गेहूं, चना, उड़द और मक्का की खेती करते हैं। साथ ही जैविक और प्राकृतिक खेती की पद्धति अपनाकर फसल चक्र के जरिए खेती कर रहे हैं, जिससे जमीन की उर्वरक क्षमता लगातार बनी रहती है। उन्होंने कहा कि पहले पानी की भारी समस्या के कारण खेती ठीक से नहीं हो पाती थी, लेकिन सोलर सिंचाई पंप लगने के बाद खेती में बड़ा बदलाव आया है।
चिंताराम ने आगे कहा कि अब उनकी उपज की मांग अन्य जिलों में भी आसानी से हो जाती है और उन्हें बेहतर बाजार भाव मिल रहा है। इससे उनकी आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। चिंताराम नायक का कहना है कि सरकार की इस योजना के कारण उनकी आय लगभग दोगुनी हो गई है।
गांव में इस सफलता ने अन्य किसानों को भी प्रेरित किया है। सौर ऊर्जा आधारित सिंचाई और वैज्ञानिक खेती पद्धति के संयोजन से क्षेत्र में कृषि का नया मॉडल विकसित होता दिखाई दे रहा है, जो जल संरक्षण, बेहतर उत्पादन और किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।