अमेरिका-चीन खींचतान के बीच भारत बन रहा दुनिया का 'तीसरा ध्रुव', यूरोप-कनाडा बढ़ा रहे रणनीतिक सहयोग

यूरोप और कनाडा भारत को बना रहे ‘तीसरा ध्रुव’, रणनीतिक रिश्तों में तेजी


मुंबई, 14 फरवरी। अमेरिका, चीन और रूस के बीच बढ़ते वैश्विक राजनीतिक तनाव के बीच यूरोप और कनाडा भारत के साथ आर्थिक और रणनीतिक सहयोग को तेज कर रहे हैं। एक नई रिपोर्ट में भारत को वैश्विक व्यवस्था में “एक व्यवहार्य तीसरा ध्रुव” बताया गया है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि मौजूदा वैश्विक परिदृश्य में अमेरिका, चीन और रूस के कारण बनी अनिश्चित और टकरावपूर्ण स्थिति ने ब्रुसेल्स और कनाडा को भारत के साथ रिश्ते गहरे करने के लिए प्रेरित किया है। भारत को चीन की तरह भू-राजनीतिक और वैचारिक बोझ से मुक्त, लेकिन बड़े पैमाने और क्षमता वाला साझेदार माना जा रहा है।

रिपोर्ट के अनुसार, भारत अमेरिका की सुरक्षा छतरी का विकल्प नहीं है और न ही चीन के विनिर्माण मॉडल की प्रतिकृति है, लेकिन वह एक तेजी से विखंडित हो रही वैश्विक अर्थव्यवस्था में “तीसरे ध्रुव” की भूमिका निभाने में सक्षम है।

भारत की तेजी से बढ़ती विनिर्माण क्षमता, अपेक्षाकृत कम श्रम लागत, बेहतर होती कानूनी संरचना, तकनीकी कौशल और विशाल घरेलू बाजार उसे इस भूमिका के लिए उपयुक्त बनाते हैं।

रिपोर्ट में कहा गया है कि यूरोप और कनाडा, अमेरिका की नीतिगत अनिश्चितता और चीन के साथ गहरे आर्थिक जुड़ाव की राजनीतिक कीमत से जूझ रहे हैं। ऐसे में वे भारत के साथ व्यापार समझौतों और रक्षा-प्रौद्योगिकी सहयोग जैसे रणनीतिक आर्थिक संबंधों को प्राथमिकता दे रहे हैं।

रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया कि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा रूस से तेल खरीद को लेकर भारत पर डाला गया दबाव अपेक्षाकृत संयमित रहा है, खासकर तब जब इसकी तुलना यूरोप के प्रति उनके सख्त रुख से की जाए।

अमेरिकी टैरिफ दबाव और राजनीतिक दूरी के चलते फ्रांस, ब्रिटेन, जर्मनी और स्पेन के नेताओं ने हाल में बीजिंग की यात्राएं की हैं या बैठक की तैयारी कर रहे हैं, ताकि बाजार तक बेहतर पहुंच सुनिश्चित की जा सके।

हालांकि, रिपोर्ट के मुताबिक इन यूरोपीय देशों के नेताओं को घरेलू स्तर पर आलोचना का सामना करना पड़ सकता है। वे लंबे समय से चीन से “डी-रिस्किंग” की बात करते रहे हैं, जिसमें आपूर्ति श्रृंखला की कमजोरियां, राष्ट्रीय सुरक्षा चिंताएं और बीजिंग का मॉस्को के साथ सामरिक जुड़ाव शामिल है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि यूरोपीय सरकारों पर मानवाधिकार समूहों और मतदाताओं का दबाव बढ़ रहा है, जो आरोप लगाते हैं कि नेता लोकतांत्रिक मूल्यों की कीमत पर व्यावसायिक हितों को प्राथमिकता दे रहे हैं। यह राजनीतिक रूप से महंगा साबित हो सकता है।
 
Similar content Most view View more

Latest Replies

Forum statistics

Threads
16,711
Messages
16,748
Members
20
Latest member
7519202689
Back
Top