अजमेर दरगाह में रुद्राभिषेक की मांग से गरमाई महाशिवरात्रि, महाराणा प्रताप सेना ने किया शिव मंदिर होने का दावा

राजस्थान: महाराणा प्रताप सेना के अध्यक्ष ने महाशिवरात्रि पर अजमेर दरगाह में रुद्राभिषेक की अनुमति मांगी


अजमेर, 14 फरवरी। महाशिवरात्रि के पावन पर्व को लेकर अजमेर में एक बार फिर धार्मिक और ऐतिहासिक बहस तेज हो गई है। महाराणा प्रताप सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. राजवर्धन सिंह परमार ने अजमेर दरगाह परिसर में रुद्राभिषेक एवं शिव पूजा की अनुमति देने के संबंध में अजमेर जिला कलेक्टर को एक औपचारिक पत्र लिखा है। पत्र में उन्होंने महाशिवरात्रि के अवसर पर शांतिपूर्ण ढंग से धार्मिक अनुष्ठान कराने की अनुमति मांगी है।

डॉ. राजवर्धन सिंह परमार ने अपने पत्र में उल्लेख किया है कि अजमेर दरगाह परिसर को लेकर लंबे समय से यह मान्यता रही है कि यह स्थल प्राचीन हिंदू शिव मंदिर से जुड़ा हुआ है।

उन्होंने कहा कि उनकी संस्था महाराणा प्रताप सेना सनातन धर्म की परंपराओं और ऐतिहासिक तथ्यों के आधार पर यह मांग कर रही है कि महाशिवरात्रि जैसे पवित्र पर्व पर शिवभक्तों को वहां रुद्राभिषेक करने का अधिकार मिलना चाहिए। पत्र में उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि कार्यक्रम पूरी तरह शांतिपूर्ण रहेगा और कानून व्यवस्था बनाए रखने में प्रशासन को पूरा सहयोग दिया जाएगा। साथ ही उन्होंने प्रशासन से अनुरोध किया कि धार्मिक भावनाओं को ध्यान में रखते हुए उचित सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, ताकि किसी प्रकार की अव्यवस्था उत्पन्न न हो।

डॉ. परमार ने यह भी कहा कि उनकी संस्था समाज में सौहार्द और ऐतिहासिक सत्य को सामने लाने के उद्देश्य से कार्य कर रही है। उन्होंने पत्र के माध्यम से जिला प्रशासन का ध्यान इस ओर आकर्षित किया कि महाशिवरात्रि करोड़ों हिंदुओं की आस्था का पर्व है और इस अवसर पर रुद्राभिषेक की अनुमति देना धार्मिक स्वतंत्रता की भावना को मजबूत करेगा।

इस मामले को लेकर एक और महत्वपूर्ण पहलू यह है कि महाराणा प्रताप सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजवर्धन सिंह परमार ने अजमेर दरगाह में हिंदू शिव मंदिर होने का दावा न्यायालय में भी पेश किया है।

उन्होंने अदालत में याचिका दाखिल कर यह कहा है कि ऐतिहासिक और धार्मिक साक्ष्यों के आधार पर यह स्थान मूल रूप से शिव मंदिर रहा है। इस प्रकरण की अगली सुनवाई 21 फरवरी को निर्धारित की गई है, जिस पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।

बताया जा रहा है कि इस मुद्दे को लेकर स्थानीय स्तर पर भी चर्चा तेज हो गई है। विभिन्न संगठनों और श्रद्धालुओं में इसे लेकर उत्सुकता बनी हुई है कि प्रशासन और न्यायालय इस पर क्या निर्णय लेते हैं।

वहीं, जिला प्रशासन की ओर से फिलहाल पत्र प्राप्त होने की पुष्टि नहीं की गई है। महाशिवरात्रि से पहले इस पत्र और न्यायालयीन सुनवाई ने अजमेर की राजनीति और धार्मिक माहौल को गरमा दिया है। अब देखना होगा कि प्रशासन महाराणा प्रताप सेना की मांग पर क्या रुख अपनाता है और 21 फरवरी की अदालत की सुनवाई इस मामले को किस दिशा में ले जाती है।
 

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