आनंद के फाल्गुन में सर्दी-जुकाम क्यों सताए? जानिए क्या खाएं, क्या नहीं, मजबूत इम्यूनिटी के लिए आयुर्वेदिक नुस्खे

फाल्गुन मास में क्यों होता है सबसे ज्यादा सर्दी-जुकाम? जानें क्या खाएं और क्या नहीं


नई दिल्ली, 14 फरवरी। बदलती ऋतु के साथ सिर्फ मौसम में ही बदलाव नहीं आता है, बल्कि आहार में भी परिवर्तन लाना जरूरी है।

2 फरवरी से फाल्गुन मास का महीना शुरू हो चुका है, जो मार्च तक चलने वाला है। इस ऋतु में पहाड़ों से आने वाली ठंडी हवा रोग-प्रतिरोधक क्षमता पर प्रभाव डालती है, जिससे सर्दी, जुकाम और वायरल तेजी से फैलता है। ऐसे में बीमारी से बचने के लिए सबसे पहले आहार में परिवर्तन लाना जरूरी है।

फाल्गुन मास को आनंद और उल्लास का मास कहा जाता है, जहां पीली सरसों हर जगह लहलहाने लगती है और माहौल भी खुशी से भरा होता है। आयुर्वेद भी मानता है कि खुशनुमा मौसम में बीमारियां सबसे पहले परेशान करती हैं क्योंकि दिन के समय गर्मी और रात के समय हल्की ठंड होती है। फाल्गुन मास की शुरुआत के साथ पित्त की वृद्धि शरीर में बढ़ती है और कफ का शमन होता है। ऐसे में आहार की सहायता से शरीर को अंदर से मजबूत बनाया जा सकता है।

पहले जानते हैं कि फाल्गुन मास में किन चीजों को खाने से मना किया गया है। इस मास चने को खाना वर्जित माना गया है क्योंकि होली की शुरुआत के साथ ही चने और गेहूं की बालियों को भूनकर खाया जाता है। आयुर्वेद मानता है कि चना पचाने में भारी होता है और फाल्गुन में पाचन अग्नि कम होती है। ऐसे में चना कब्ज और गैस की परेशानी पैदा कर सकता है। इसके अलावा, बासी और तामसिक भोजन से भी परहेज करना चाहिए क्योंकि आध्यात्मिक दृष्टि से भी फाल्गुन का महीना महत्वपूर्ण है। महाशिवरात्रि की वजह से इस पूरे महीने को महादेव का कहा जाता है।

अब जानते हैं कि क्या खाना चाहिए। फाल्गुन माह में बेर और अंगूर का सेवन शरीर के लिए लाभकारी होता है। इन दोनों के सेवन से पेट ठंडा रहता है और रक्त भी शुद्ध होता है। बेर और अंगूर मौसमी बीमारियों से शरीर की रक्षा भी करते हैं और रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाते हैं। इसके अलावा, इस माह में सुबह जल्दी उठकर व्यायाम करना भी लाभकारी बताया गया है। प्रकृति के अनुसार ही भोजन में बदलाव करके शरीर को बिना दवा के स्वस्थ रखा जा सकता है। आहार परिवर्तन और जीवनशैली में बदलाव ही शरीर को ऊर्जा देने का काम करते है।
 

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