बेहाला पश्चिम: जहाँ वाम के बाद टीएमसी का राज, क्या भाजपा तोड़ पाएगी इस अजेय किले का तिलिस्म

बेहाला पश्चिम: वाम से टीएमसी के गढ़ तक, भाजपा को अभी भी पहली जीत की तलाश


कोलकाता, 13 फरवरी। कोलकाता की बेहाला पश्चिम विधानसभा सीट पश्चिम बंगाल की राजनीति में काफी महत्वपूर्ण है। यह एक सामान्य श्रेणी की शहरी सीट है, जो कोलकाता दक्षिण लोकसभा क्षेत्र का हिस्सा है। इस सीट का चुनावी इतिहास जटिल और बदलावों से भरा रहा है, लेकिन इस सदी की शुरुआत से यह तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) का मजबूत गढ़ बन चुकी है।

बेहाला क्षेत्र की विधानसभा यात्रा तीन मुख्य चरणों में बांटी जा सकती है। मूल बेहाला सीट 1951 में बनी और 1962 तक अस्तित्व में रही। 1952 में ऑल इंडिया फॉरवर्ड ब्लॉक ने जीत हासिल की, जबकि 1957 और 1962 में सीपीआई ने कब्जा किया। 1967 में सीट को बेहाला पूर्व और बेहाला पश्चिम में विभाजित किया गया, जो 2006 तक चला। इस दौरान वामपंथी पार्टियों का दबदबा रहा। कुल 11 चुनावों में 9 बार वाम ने जीत दर्ज की। 2001 में टीएमसी ने इस वाम गढ़ में सेंध लगाई और पार्थ चटर्जी यहां से लगातार जीतते रहे।

2011 के परिसीमन के बाद सीट का नाम बेहाला पश्चिम हुआ और सीमाएं बदलीं। अब यह कोलकाता नगर निगम के वार्ड 118, 119, 125 से 132 तक फैली है। पार्थ चटर्जी ने 2011 में सीपीएम के अनुपम देबसरकार को 59,021 वोटों से हराया। 2016 में सीपीएम के कौस्तव चटर्जी ने कड़ी टक्कर दी, लेकिन जीत का अंतर घटकर 8,896 वोट रह गया। 2021 में पार्थ चटर्जी ने भाजपा की श्राबंती चटर्जी को 50,884 वोटों से हराया। टीएमसी ने यहां लगातार पांच विधानसभा चुनाव जीते हैं।

लोकसभा स्तर पर भी टीएमसी की पकड़ मजबूत रही। 2009 से 2024 तक चार चुनावों में टीएमसी ने बेहाला पश्चिम से बढ़त बनाई। पार्टी ने 2009 में सीपीएम से 35,386 वोट, 2014 में 23,138 वोट, 2019 में भाजपा से 16,165 वोट और 2024 में 15,196 वोट की बढ़त बनाई। 2021 में 3,13,198 मतदाता थे, जो 2024 में बढ़कर लगभग 3,18,301 हो गए।

मतदान प्रतिशत की बात करें तो यह विधानसभा में अधिक, जबकि लोकसभा में कम रहा। विधानसभा चुनाव में 2011 में 77.83 प्रतिशत, 2016 में 75.49 प्रतिशत और 2021 में 74.15 प्रतिशत मतदान दर्ज हुआ। वहीं, लोकसभा में 2019 में 73.53 प्रतिशत और 2024 में 69.16 प्रतिशत मतदान रहा।

बेहाला ऐतिहासिक इलाका है, जिसकी जड़ें औपनिवेशिक काल से जुड़ी हैं। सबर्णा रॉय चौधरी जैसे जमींदार परिवारों से संबंधित, यह डायमंड हार्बर रोड के किनारे बसा है। बेहाला चौरास्ता, सखेर बाजार, सबर्णा संग्रहालय, दुर्गा पूजा पंडाल और फ्लाइंग क्लब जैसे स्थान इसे जीवंत बनाते हैं। यहां की कनेक्टिविटी अच्छी है। डायमंड हार्बर रोड से मैदान और मध्य कोलकाता जुड़ता है। जोका-एस्प्लेनेड मेट्रो कॉरिडोर ने नई सुविधा दी है। हावड़ा स्टेशन 10-12 किमी, सियालदह 12-15 किमी और दमदम एयरपोर्ट 25-30 किमी दूर है।

कागजी तौर पर टीएमसी 2026 चुनावों में मजबूत दिखती है, क्योंकि पार्टी लगातार नौ बार (5 विधानसभा और 4 लोकसभा) आगे रही। जहां भाजपा अभी गंभीर चुनौती नहीं दे पाई, वहीं लेफ्ट-कांग्रेस गठबंधन कमजोर है।
 

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