शिक्षा में AI का युग शुरू! अब जिम्मेदारी और समानता के साथ होगा भारत की शिक्षा व्यवस्था में बड़ा बदलाव

शिक्षा व्यवस्था में एआई का इस्तेमाल जिम्मेदारी और बराबरी के साथ होगा


नई दिल्ली, 13 फरवरी। भारत बोधन एआई कॉन्क्लेव का शुक्रवार को समापन हुआ। इस दो दिवसीय आयोजन में यह स्पष्ट किया गया कि अब देश की शिक्षा व्यवस्था में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) का इस्तेमाल जिम्मेदारी और बराबरी के साथ बड़े स्तर पर किया जाएगा।

शिक्षा मंत्रालय द्वारा आयोजित इस कॉन्क्लेव में देशभर से नीति-निर्माता, राज्य सरकारों के अधिकारी, शिक्षक, रिसर्चर, स्टार्टअप और टेक्नोलॉजी एक्सपर्ट शामिल हुए थे। इसकी शुरुआत गुरुवार को नई दिल्ली में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने की थी।

केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय के मुताबिक, करीब 3,100 विशेषज्ञों ने रजिस्ट्रेशन कराया, लगभग 2,000 छात्र पहुंचे, 600 से ज्यादा विभिन्न संस्थानों के प्रतिनिधि आए और 120 प्रदर्शकों ने एआई से जुड़े अपने शैक्षणिक मॉडल और तकनीक दिखाई।

दूसरे दिन, यानी शुक्रवार के पहले सत्र में इस बात पर मंथन किया गया कि अब राज्य सरकारें सिर्फ डाटा देखने तक सीमित नहीं रहना चाहतीं, बल्कि एआई की मदद से सीधे हस्तक्षेप कर व्यवस्था में सुधार करना चाहती हैं। रियल-टाइम डैशबोर्ड से तुरंत फैसले लिए जा रहे हैं और अलग-अलग सिस्टम की जगह एकीकृत प्लेटफॉर्म बनाए जा रहे हैं। यहां साफ कहा गया कि एआई को सफल बनाना है तो छोटे-छोटे अलग समाधान नहीं, बल्कि पूरे राज्य स्तर का मजबूत प्लेटफॉर्म होना चाहिए।

दूसरे सत्र में बहुभाषी एआई और शिक्षकों की भूमिका पर जोर रहा। वक्ताओं ने कहा कि अगर एआई को सच में देशभर में कामयाब होना है तो वह हर भाषा में उपलब्ध होना चाहिए। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया कि एआई शिक्षक की जगह नहीं लेगा, बल्कि उन्हें मजबूत करेगा। अभ्यास पर आधारित पढ़ाई के मॉडल से बच्चों की भागीदारी और सीखने के नतीजों में सुधार देखा गया है।

तीन बड़ी बातें जो निकलकर आईं उनमें भारत में एआई-आधारित शिक्षा समाधान को बड़े स्तर पर लागू करने की जरूरत बताई गई है। पढ़ाई में सुधार की सबसे बड़ी कुंजी शिक्षक होगा। आगे बढ़ने के लिए एक राष्ट्रीय स्तर का समन्वय प्लेटफॉर्म जरूरी होगा।

शिक्षा मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों ने कहा कि एआई की मदद से हर बच्चे को उसकी जरूरत के मुताबिक पढ़ाई में मदद दी जा सकती है। साथ ही मातृभाषा में आनंददायक शिक्षा और भारत का अपना लार्ज लैंग्वेज मॉडल विकसित करने पर भी जोर दिया गया।

कॉन्क्लेव ने यह संदेश दिया कि तकनीक का इस्तेमाल तभी सफल होगा जब वह समावेशी हो, भाषा विविधता का सम्मान करे और शिक्षा को और बेहतर, आसान और प्रभावी बनाए।
 

Latest Replies

Trending Content

Forum statistics

Threads
14,005
Messages
14,042
Members
20
Latest member
7519202689
Back
Top