यूपी में सड़क हादसों पर गरजीं आराधना मिश्रा मोना: 'हर 20 मिनट में एक परिवार हो रहा तबाह'

'हर 20 मिनट में उजड़ रहा एक परिवार’, सड़क हादसों पर बोलीं आराधना मिश्रा मोना


लखनऊ, 13 फरवरी। उत्तर प्रदेश विधानसभा में शुक्रवार को कांग्रेस ने प्रदेश में बढ़ती सड़क दुर्घटनाओं और मौतों का मुद्दा जोरदार ढंग से उठाया। नेता विधानमंडल दल कांग्रेस आराधना मिश्रा मोना ने नियम-56 के तहत चर्चा करते हुए राज्य में सड़क सुरक्षा को लेकर किए जा रहे सरकारी प्रयासों को अपर्याप्त बताते हुए दुर्घटना बाहुल्य क्षेत्रों (ब्लैक स्पॉट) पर ठोस और तकनीकी हस्तक्षेप की मांग की।

आराधना मिश्रा मोना ने कहा कि 25 करोड़ से अधिक आबादी वाले प्रदेश में प्रतिदिन लाखों लोग सड़कों पर यात्रा करते हैं, लेकिन दुर्भाग्यवश उत्तर प्रदेश सड़क दुर्घटनाओं में भी अग्रणी होता जा रहा है। उन्होंने कहा कि तेज रफ्तार 56 प्रतिशत दुर्घटनाओं का कारण है, 12 प्रतिशत मौतें गलत दिशा में वाहन चलाने से और 8 प्रतिशत नशे में ड्राइविंग से हो रही हैं। उनके मुताबिक प्रतिवर्ष करीब 45 हजार सड़क हादसे हो रहे हैं, जिनमें 24 हजार से अधिक लोगों की मौत हो रही है।

उन्होंने कहा कि 2014 में सड़क दुर्घटनाओं में जान गंवाने वालों की संख्या 16 हजार थी, जो 2024 में बढ़कर 24 हजार के पार पहुंच गई है। आज हालात यह है कि प्रतिदिन औसतन 65 मौतें हो रही हैं—हर घंटे लगभग तीन लोग और हर 20 मिनट में एक परिवार उजड़ रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि मृतकों में 50 प्रतिशत से अधिक युवा हैं, जो प्रदेश और देश का भविष्य थे।

कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि चिन्हित ब्लैक स्पॉट्स पर सरकार की कार्रवाई केवल प्रतीकात्मक है। उन्होंने कहा कि अकेले आगरा जिले में 44 ब्लैक स्पॉट चिन्हित हैं, जहां वर्ष 2024 में 586 लोगों की जान गई। बाराबंकी देश के 100 प्रमुख ब्लैक स्पॉट्स में शामिल है। इसके बावजूद सड़क एलाइनमेंट, डिजाइन और तकनीकी खामियों के स्थायी समाधान की दिशा में अपेक्षित कदम नहीं उठाए गए। उन्होंने हालिया हादसों का जिक्र करते हुए कहा कि मथुरा में यमुना एक्सप्रेसवे पर बस से उतर रहे 10 लोगों को डंपर ने कुचल दिया, रायबरेली में गंगा एक्सप्रेस-वे पर दर्दनाक हादसा हुआ, जबकि एक्सप्रेस-वे अभी शुरू भी नहीं हुआ है। कानपुर में ओवरस्पीडिंग से 10 लोगों की मौत हुई।

उन्होंने कहा कि 31 जनवरी तक चलाया गया सड़क सुरक्षा अभियान महज औपचारिकता बनकर रह गया और प्रचार-प्रसार पर खर्च से दुर्घटनाएं नहीं रुकेंगी। आराधना मिश्रा मोना ने कहा कि प्रदेश में 5 करोड़ से अधिक वाहन हैं, जबकि ट्रैफिक पुलिस कर्मियों की संख्या करीब 9 हजार है, जो स्वीकृत 11,930 पदों से भी कम है। उन्होंने कहा कि उच्चतम न्यायालय की सड़क सुरक्षा समिति के मानकों के अनुरूप कम से कम 30 हजार ट्रैफिक कर्मियों की तैनाती आवश्यक है।

उन्होंने सरकार को सुझाव देते हुए कहा कि सभी चिन्हित ब्लैक स्पॉट्स पर विशेषज्ञों से इंजीनियरिंग ऑडिट कराया जाए, सड़क संरचना और डिजाइन में तत्काल सुधार हो, प्रत्येक जिले में आईटीएमएस (इंटेलिजेंट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम) लागू किया जाए, डिजिटल ट्रैफिक निगरानी व्यवस्था सशक्त की जाए, ट्रैफिक पुलिस और होमगार्ड की तत्काल भर्ती हो तथा स्कूल-कॉलेज स्तर पर सड़क सुरक्षा शिक्षा अनिवार्य की जाए। साथ ही दुर्घटना पीड़ित परिवारों के लिए पारदर्शी और स्थायी सहायता योजना लागू करने की भी मांग की।
 

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