पीएमएफएमई योजना ने बदल दी बिहार के विनोद-मोना की जिंदगी, काशीबीघा में जगी आत्मनिर्भरता की नई उम्मीद

बिहार: पीएमएफएमई योजना से छोटे किसानों को मिली नई राह, विनोद-मोना की कहानी बनी काशीबीघा गांव के लिए प्रेरणा


शेखपुरा, 13 फरवरी। बिहार के शेखपुरा जिले के बरबीघा प्रखंड अंतर्गत काशीबीघा गांव के किसान विनोद कुमार कभी सीमित आय और पारंपरिक खेती पर निर्भर थे, लेकिन आज वे आत्मनिर्भर भारत की सशक्त तस्वीर बनकर उभरे हैं। प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यम योजना का औपचारीकरण (पीएमएफएमई) का लाभ लेकर उन्होंने न केवल अपने जीवन की दिशा बदली, बल्कि गांव के अन्य किसानों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बन गए हैं।

विनोद कुमार बताते हैं कि पहले वे पारंपरिक तरीके से खेती करते थे, जिससे आमदनी सीमित रहती थी और परिवार का भरण-पोषण मुश्किल से हो पाता था। योजना की जानकारी मिलने के बाद उन्होंने अपनी पत्नी मोना कुमारी के साथ मिलकर इसका लाभ उठाने का निर्णय लिया।

योजना के तहत उन्हें आर्थिक सहायता और प्रशिक्षण मिला, जिससे उन्होंने जैविक खेती की ओर कदम बढ़ाया।

विनोद कुमार और मोना कुमारी ने समाचार एजेंसी आईएएनएस से बातचीत में बताया कि वे जैविक तरीके से हल्दी, मिर्च और धनिया की खेती कर रहे हैं। फसल तैयार होने के बाद वे उसे सीधे बाजार में बेचने के बजाय उसका प्रसंस्करण कर पाउडर तैयार करते हैं। आधुनिक और स्वच्छ मशीनों से तैयार हल्दी व मिर्च पाउडर की गुणवत्ता बेहतर होने के कारण बाजार में इसकी मांग लगातार बढ़ रही है। योजना के तहत उन्होंने मसाला पैकिंग के लिए पाउच मशीन भी खरीदी है, जिससे वे आकर्षक पैकेट तैयार कर छोटे शहरों से लेकर बड़े शहरों तक अपने उत्पाद भेज रहे हैं।

मोना कुमारी ने बताया कि पहले वे केवल गृहिणी थीं, लेकिन अब पति के साथ कंधे से कंधा मिलाकर व्यवसाय संभाल रही हैं। उन्होंने कहा कि पहले जहां आमदनी सीमित थी, अब अच्छी-खासी कमाई हो रही है। उनके उत्पाद की मांग बड़े शहरों तक है और वहां नियमित रूप से आपूर्ति की जा रही है। उन्होंने बताया कि उनके मसाले पूरी तरह जैविक हैं और बिना किसी रासायनिक मिलावट के तैयार किए जाते हैं। यही वजह है कि ग्राहकों का भरोसा उनके ब्रांड पर लगातार बढ़ रहा है।

मोना कुमारी और विनोद कुमार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार व्यक्त करते हुए कहते हैं कि यह योजना छोटे किसानों के लिए वरदान साबित हो रही है। उनका कहना है कि यदि आर्थिक सहायता और मार्गदर्शन नहीं मिलता, तो शायद वे आज इस मुकाम तक नहीं पहुंच पाते। उनकी सफलता से प्रेरित होकर गांव के अन्य किसान भी अब पारंपरिक खेती के साथ-साथ प्रसंस्करण की ओर कदम बढ़ा रहे हैं, ताकि अपनी उपज का बेहतर मूल्य प्राप्त कर सकें। काशीबीघा गांव धीरे-धीरे आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

उद्योग विभाग के महाप्रबंधक सुजात ने बताया कि पीएमएफएमई योजना शेखपुरा जिले के सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यमियों के लिए अत्यंत लाभकारी साबित हो रही है। उन्होंने कहा कि यह योजना आर्थिक सशक्तीकरण के साथ-साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी बढ़ा रही है।

उन्होंने जानकारी दी कि मोना कुमारी को योजना के तहत आर्थिक सहायता और तकनीकी मार्गदर्शन मिला, जिससे उन्होंने सफलतापूर्वक अपना व्यवसाय शुरू किया। आज वे न केवल अपने परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत कर रही हैं, बल्कि अन्य महिलाओं के लिए भी प्रेरणा स्रोत बनकर उभरी हैं। उद्योग विभाग ने जिले के इच्छुक लोगों से अपील की है कि वे इस योजना का लाभ उठाकर आत्मनिर्भर बनने की दिशा में ठोस कदम बढ़ाएं।
 

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