नई दिल्ली, 13 फरवरी। राज्यसभा में शुक्रवार को भारतीय जनता पार्टी के सांसद डॉ. के. लक्ष्मण ने ‘प्रधानमंत्री विश्वकर्मा’ योजना के विस्तार की मांग उठाई। इस योजना की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि इसके दूसरे चरण को और अधिक सशक्त रूप में शुरू व लागू करना चाहिए।
सदन में बोलते हुए, उन्होंने कहा कि यह योजना पूज्य बापू महात्मा गांधी के ग्राम स्वराज के स्वप्न को साकार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने इसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में शुरू की गई ऐतिहासिक पहल बताते हुए कहा कि इसका मूल मंत्र ‘सम्मान, सामर्थ्य और समृद्धि’ है। प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना पारंपरिक कारीगरों और श्रमिक वर्ग को सशक्त बनाने के लिए शुरू की गई है। इसका उद्देश्य 18 पारंपरिक व्यवसायों से जुड़े कारीगरों को पहचान, प्रशिक्षण, टूलकिट और बिना गारंटी ऋण उपलब्ध कराना है। 12 लाख लोगों को इस योजना के तहत टूलकिट वितरित की जा चुकी है।
इस योजना के तहत बिना गारंटी ऋण भी दिया गया है। 5.18 लाख लाभार्थियों को अब तक यह ऋण दिया जा चुका है। डॉ. के. लक्ष्मण ने सदन में कहा कि यह योजना हमारे पूज्य बापू, महात्मा गांधी के स्वप्न, यानी ग्राम स्वराज और रामराज्य की परिकल्पना को साकार करने की दिशा में एक ठोस कदम है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में सम्मान, समर्थ्य और समृद्धि के मंत्र के साथ यह ऐतिहासिक पहल शुरू की गई।
उन्होंने कहा कि यह योजना केवल एक सरकारी कार्यक्रम नहीं है, बल्कि ग्रामीण और विशेषकर वंचित व कमजोर वर्गों को सशक्त बनाने की अटूट प्रतिबद्धता का प्रमाण है। दशकों तक हमारे ग्रामीण और असंगठित अर्थव्यवस्था की रीढ़ यानी हमारे पारंपरिक कारीगर, औपचारिक पहचान और समर्थन से वंचित रहे। उन्होंने कहा कि सुतार, स्वर्णकार, राजमिस्त्री, लोहार, मूर्तिकार, कुम्हार, नाई, फूलमाला बनाने वाले, धोबी, दर्जी इन सभी परंपरागत शिल्पकारों को पहली बार एक समग्र योजना के माध्यम से सम्मान और अवसर मिला।
इस योजना के तहत कौशल उन्नयन, आधुनिक टूलकिट, बिना जमानत ऋण, डिजिटल लेन-देन प्रोत्साहन, ब्रांड प्रमोशन और बाजार से जुड़ाव जैसी व्यापक सहायता प्रदान की गई है। इससे ये कारीगर देश की मुख्यधारा से जुड़ रहे हैं और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के वास्तविक विकासकर्ता के रूप में उभर रहे हैं। डॉ. लक्ष्मण ने कहा कि ये उपलब्धियां अत्यंत प्रेरणादायक हैं। वर्ष 2025 तक 30 लाख से अधिक पंजीकरण हो चुके हैं। इनमें से लगभग 54 प्रतिशत अन्य पिछड़ा वर्ग से हैं, और लगभग 27 प्रतिशत अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति तथा अल्पसंख्यक समुदाय से हैं।
उन्होंने कहा, "मेरे राज्य तेलंगाना में ही 89,000 से अधिक कारीगरों ने पंजीकरण कराया है, और लगभग 63,000 ने कौशल प्रशिक्षण पूरा किया है। देशभर में 5,040 कौशल केंद्र इस मिशन को गति दे रहे हैं। यह इस योजना के प्रति जनता के विश्वास का स्पष्ट प्रमाण है। प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना केवल एक योजना नहीं है, बल्कि यह भारत की पारंपरिक शिल्प संस्कृति के पुनर्जागरण का मिशन है।"
डॉ. लक्ष्मण ने कहा कि वह सरकार से आग्रह करते हैं कि इस योजना के दूसरे चरण को और अधिक सशक्त रूप में विस्तारित किया जाए। देश के लाखों कारीगर इस योजना की निरंतरता की प्रतीक्षा कर रहे हैं, ताकि वे आत्मनिर्भर बनकर भारत को समृद्ध राष्ट्र बनाने की यात्रा में सहभागी बने रहें।