राहुल गांधी की सदस्यता रद्द करने की मांग पर सियासी घमासान, विपक्ष का आरोप- 'भाजपा की साजिश'

राहुल गांधी की सदस्यता रद्द करने की मांग पर गरमाई सियासत; विपक्ष बोला-साजिश रच रही है भाजपा


नई दिल्ली, 13 फरवरी। भाजपा सांसद निशिकांत दुबे की लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की सदस्यता रद्द करने की मांग पर सियासत गर्मा गई है। विपक्ष के नेताओं ने एनडीए के सांसदों पर आरोप लगाते हुए कहा कि ये लोग राहुल गांधी के खिलाफ साजिश रच रहे हैं।

कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी ने समाचार एजेंसी आईएएनएस से बात करते हुए कहा, "जो लोग संसदीय प्रक्रिया के बारे में जानते हैं, वे इस पर सिर्फ हंस सकते हैं। हंगामा करने की कोशिश की जा रही है। यह किसके खिलाफ किया जा रहा है? आयरन मैन राहुल गांधी के खिलाफ हो रहा है? वे एक बार उनकी सदस्यता ले चुके हैं, लेकिन उन्हें कौन डरा सकता है या रोक सकता है? वे लोगों की आवाज हैं। किसानों की आवाज हैं। दुनिया में कोई उन्हें रोक नहीं सकता। भाजपा चाहे कितने भी जन्म ले ले, वह राहुल गांधी को न तो डरा सकती है न रोक सकती है।"

कांग्रेस नेता राजीव शुक्ला ने आईएएनएस से बात करते हुए कहा, 'निशिकांत दुबे ने कहा कि वह राहुल गांधी को संसद सदस्यता से निकलवाएंगे तो निकलवाएं। राहुल गांधी ने कह दिया है कि हम झुकेंगे नहीं और ये लड़ाई लड़ते रहेंगे।'

समाजवादी पार्टी सांसद रामगोपाल यादव ने भाजपा नेता निशिकांत दुबे के बयान पर कहा, "राहुल गांधी की सदस्यता रद्द करने के लिए निशिकांत दुबे कोई प्रस्ताव लाएंगे तो सबसे पहले तो उनकी सदस्यता खत्म हो जानी चाहिए, क्योंकि उनसे ज्यादा तो गलत कोई और बोल ही नहीं सकता।"

भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने बीते दिनों लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को एक पत्र लिखा था, जिसमें उन्होंने लिखा, "राहुल गांधी ने देश के पूरे नैतिक ताने-बाने को तोड़ दिया है। राहुल गांधी 'भारत को अंदर से अस्थिर करने वाले ठग गैंग' का एक हिस्सा हैं और संसद के अंदर और बाहर उनके सोचे-समझे काम देश के लिए नुकसानदायक हैं। यह देश के कोने-कोने में गंभीर चर्चा का विषय है।" भाजपा सांसद ने दो पन्नों के पत्र में राहुल गांधी के चार गलत कामों को भी गिनाया था।

उन्होंने कहा, "लोगों की भावनाओं को भड़काने के लिए उन्होंने न सिर्फ भारत के चुनाव आयोग पर बल्कि सुप्रीम कोर्ट पर भी बेबुनियाद आरोप लगाए हैं। बिना किसी ठोस सबूत के सरकार की गरिमा को कम करने की कोशिश की और जॉर्ज सोरोस और सैम पित्रोदा के साथ मिलीभगत से कई दूसरे संस्थानों को बदनाम किया। एक सांसद और नेता प्रतिपक्ष के तौर पर उनके सभी 'गलत व्यवहार' की तुरंत जांच की जाए, ताकि उन्हें लोकसभा से तुरंत निकाला जा सके।"
 

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