सार्वजनिक स्वास्थ्य में AI की क्रांति! भारत ने दूर की डॉक्टरों की कमी, बीमारियों से जंग में मिली बड़ी ताकत

भारत ने सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं में एआई को किया शामिल, हेल्थ सेक्टर को मिली मजबूती


नई दिल्ली, 13 फरवरी। एक आधिकारिक बयान में शुक्रवार को कहा गया कि भारत ने अपनी सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं में बड़ा बदलाव किया है। अब देश ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) को एक नई रणनीति के तहत स्वास्थ्य व्यवस्था में शामिल किया है, जिसका उद्देश्य डॉक्टरों की कमी को दूर करना और लोगों तक बेहतर इलाज पहुंचाना है।

सरकार ने नेशनल टीबी एलिमिनेशन प्रोग्राम, नेशनल डायबिटिक रेटिनोपैथी स्क्रीनिंग प्रोग्राम और बीमारी निगरानी सिस्टम में एआई टूल्स का इस्तेमाल शुरू किया है, जिससे ऐसे स्वास्थ्यकर्मी भी जांच कर पा रहे हैं जो विशेषज्ञ डॉक्टर नहीं हैं। इसका फायदा यह हुआ है कि टीबी से होने वाले गंभीर मामलों में 27 प्रतिशत की कमी आई है और 4,500 से ज्यादा बीमारी फैलने के अलर्ट समय पर मिल चुके हैं।

बयान में कहा गया है कि ई-संजीवनी सेवा के जरिए यह बदलाव और मजबूत हुआ है। इस ऑनलाइन सेवा के जरिए अब तक 28.2 करोड़ से ज्यादा लोगों को सलाह और इलाज मिल चुका है, जिसमें एआई की मदद से बीमारी पहचानने में सहायता मिलती है। इसके अलावा कुपोषण पर नजर रखने के लिए उदयोगयंत्र एआई सिस्टम का भी इस्तेमाल किया जा रहा है।

अब भारत का यह हेल्थ सिस्टम केवल संक्रामक बीमारियों तक सीमित नहीं है, बल्कि कैंसर के इलाज, आयुर्वेद जैसी पारंपरिक चिकित्सा के आधुनिकीकरण और नेशनल वन हेल्थ प्रोग्राम तक फैल चुका है।

भारत 16 से 20 फरवरी तक नई दिल्ली में ग्लोबल साउथ के पहले अंतरराष्ट्रीय एआई शिखर सम्मेलन की मेजबानी करेगा, जिसमें दुनिया भर के नेता, नीति निर्माता, टेक्नोलॉजी कंपनियां और विशेषज्ञ हिस्सा लेंगे।

इस समिट में एआई से जुड़ी नीतियों, रिसर्च, उद्योग और आम लोगों की भागीदारी पर चर्चा होगी।

सरकार के अनुसार, एआई की मदद से स्वास्थ्य सेवाओं की कमी दूर हो रही है। इससे दवाओं और मेडिकल उपकरणों की गुणवत्ता बेहतर हो रही है और इलाज सस्ता व आसान बन रहा है। एआई की सहायता से बीमारी की जल्दी पहचान, सही इलाज का फैसला और दूर-दराज के इलाकों में इलाज संभव हो पा रहा है।

मार्च 2024 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 'इंडियाएआई मिशन' को मंजूरी दी थी, जिसके लिए 10,371.92 करोड़ रुपए का बजट रखा गया है। इस मिशन का उद्देश्य एआई के जरिए देश के सामाजिक और आर्थिक विकास को बढ़ावा देना है।

सरकार ने बताया कि इस मिशन के तहत 'इंडियाएआई एप्लिकेशन डेवलपमेंट इनिशिएटिव' नाम की एक योजना भी चलाई जा रही है, जिसका मकसद ऐसी एआई तकनीक विकसित करना है जो देश की बड़ी समस्याओं का समाधान कर सके। उन्नत और बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं इसी पहल का एक महत्वपूर्ण परिणाम हैं।
 

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