13 साल की उम्र में डेब्यू, हर किरदार में दिखाई संजीदगी, सुर्खियों में रही विनोद मेहरा की निजी जिंदगी

13 साल की उम्र में डेब्यू, हर किरदार में दिखाई संजीदगी, सुर्खियों में रही विनोद मेहरा की निजी जिंदगी


मुंबई, 12 फरवरी। हिंदी सिनेमा के उन अभिनेताओं में विनोद मेहरा का नाम खास है, जिन्होंने शोर-शराबे के बिना सहज और भावुक अभिनय से दर्शकों के दिल जीते। मासूम चेहरे, शांत व्यक्तित्व और खास अंदाज के साथ उन्होंने दर्शकों के दिलों में खास जगह बनाई।

13 फरवरी 1945 को अमृतसर में जन्मे विनोद मेहरा ने बचपन से ही अभिनय की दुनिया में कदम रखा। साल 1958 में फिल्म 'रागिनी' में बाल कलाकार के रूप में डेब्यू किया, जहां उन्होंने किशोर कुमार के बचपन के किरदार को निभाया। साल 1971 में 'एक थी रीता' से उन्होंने बतौर अभिनेता डेब्यू किया, जो सुपरहिट रही।

60 के दशक के अंत और 70 के दशक में जब धर्मेंद्र और राजेश खन्ना जैसे सितारे चमक रहे थे, विनोद मेहरा का शांत, सौम्य और चॉकलेटी इमेज अलग पहचान बना। उनकी हेयरस्टाइल की नकल उनके फैंस करते थे। विनोद का अभिनय दिखावे से दूर, निजी और स्वाभाविक था। वह पर्दे पर अभिनय नहीं करते बल्कि किरदार को जीते थे। उनकी आंखों में नमी और चमक, धूप से खिलने वाली हंसी और संवाद अदायगी की खास आवाज उन्हें दूसरे अभिनेताओं से अलग करती थी। आम इंसान की भावनाएं, रिश्तों की नाजुकता और भीतर का संघर्ष उनके किरदार में साफ झलकता था।

विनोद मेहरा ज्यादातर सहायक या रोमांटिक भूमिकाओं में नजर आए, लेकिन उनकी कुछ फिल्में आज भी कभी न भूलने वाली हैं। 'अनुराग', 'अमर प्रेम', 'घर', 'बेमिसाल', 'लाल पत्थर', 'स्वीकार किया मैंने' और 'कर्तव्य' जैसी फिल्मों में उनका काम सराहा गया।

'लाल पत्थर' में उन्होंने शेखर नाम का ईमानदार और भावुक युवक निभाया। रेखा, योगिता बाली, मौशमी चटर्जी, बिंदिया गोस्वामी जैसी हीरोइनों के साथ उनकी केमिस्ट्री खूब जमती थी। जहां उस दौर में नाटकीय प्रदर्शन आम थे, विनोद ने शांत और यथार्थवादी अंदाज अपनाया। रोमांटिक, सीधे-सादे और परिवार प्रेमी किरदारों में वह माहिर थे।

विनोद मेहरा को मुकाम उतना नहीं मिला जितना उनकी काबिलियत थी, फिर भी उनकी कुछ बेमिसाल फिल्में और सहज अभिनय हिंदी सिनेमा के इतिहास में हमेशा जीवित रहेंगे। उन्होंने 'गुरुदेव' फिल्म का निर्देशन और प्रोडक्शन भी किया, जिसमें श्रीदेवी, ऋषि कपूर और अनिल कपूर मुख्य भूमिकाओं में थे, लेकिन दिल का दौरा पड़ने से 30 अक्टूबर 1990 को सिर्फ 45 साल की उम्र में उनका निधन हो गया। फिल्म 'गुरुदेव' उनकी मौत के बाद 1993 में रिलीज हुई।

विनोद मेहरा की पर्सनल लाइफ भी सुर्खियों में रही। अभिनेता ने अपनी जिंदगी में तीन शादियां की थीं। उनकी मीना ब्रोका, बिंदिया गोस्वामी और किरण मेहरा तीन पत्नी थीं और चौथी शादी अभिनेत्री रेखा से करने की अफवाह है। हालांकि, इस खबर का रेखा ने एक इंटरव्यू में खंडन किया था।

हालांकि, यासिर उस्मान की किताब 'रेखा: द अनटोल्ड स्टोरी' में उनकी शादी के बारे में जानकारी मिलती है। फिल्म 'ऐलान' की शूटिंग के दौरान रेखा और विनोद मेहरा के बीच आकर्षण बढ़ने लगा। दोनों एक-दूसरे को पसंद करने लगे और 1970 के दशक में उन्होंने चुपके से शादी कर ली। यह शादी कोलकाता में हुई थी। शादी के बाद विनोद मेहरा रेखा को बॉम्बे अपने घर ले गए, लेकिन परिवार ने इस रिश्ते को स्वीकार करने से साफ इनकार कर दिया। घरवालों के विरोध के कारण यह रिश्ता ज्यादा दिनों तक नहीं चल सका और दोनों अलग हो गए। फिर भी, दोनों के बीच का यह प्रेम और शादी का राज लंबे समय तक चर्चा में रहा। हालांकि, यह रिश्ता कभी ऑफिशियल नहीं हुआ।
 
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