पाकिस्तान में भ्रष्टाचार सिर्फ नैतिक विचलन नहीं, बल्कि संरचनात्मक और आर्थिक तौर पर देश को खोखला कर रहा है

रिपोर्ट: पाकिस्तान में भ्रष्टाचार का असर नैतिक नहीं, बल्कि संरचनात्मक और आर्थिक


इस्लामाबाद, 12 फरवरी। पाकिस्तान में भ्रष्टाचार को अक्सर नैतिक या आपराधिक विचलन के रूप में पेश किया जाता है, लेकिन इसका सबसे गहरा प्रभाव संरचनात्मक और आर्थिक स्तर पर पड़ता है। एक रिपोर्ट में कहा गया है कि सार्वजनिक निवेश पर किए गए तुलनात्मक अध्ययन दर्शाते हैं कि भ्रष्टाचार केवल धन की हेराफेरी तक सीमित नहीं रहता, बल्कि परियोजनाओं की लागत बढ़ाता है, खरीद प्रक्रिया को प्रभावित करता है और परियोजनाओं की व्यवहार्यता को कमजोर करता है।

पाकिस्तान के प्रमुख दैनिक ‘द न्यूज इंटरनेशनल’ में वकील मुस्तफा आरिफ ने लिखा कि ये कमजोरियां विशेष रूप से मेगा-प्रोजेक्ट्स में और बढ़ जाती हैं, जहां भारी पूंजी प्रवाह, जटिल अनुबंध और सीमित संस्थागत नेटवर्क के हाथों में निर्णय लेने की शक्ति होती है, जिनमें प्रभावी निगरानी की क्षमता कम होती है। उन्होंने कहा, “ऐसे संदर्भ में भ्रष्टाचार कोई आकस्मिक विफलता नहीं, बल्कि संस्थागत और संविदात्मक ढांचे का पूर्वानुमेय परिणाम बन जाता है।”

आरिफ के अनुसार, मेगा-प्रोजेक्ट्स में भ्रष्टाचार की निरंतरता कानून की कमी से ज्यादा औपचारिक जवाबदेही तंत्र और बड़े बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को नियंत्रित करने वाली राजनीतिक वास्तविकताओं के बीच असंगति का परिणाम है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि पाकिस्तान में सार्वजनिक खर्च को नियंत्रित करने के लिए मौजूद खरीद नियम, ऑडिट प्रक्रियाएं और जवाबदेही एजेंसियां एक ऐसी राजनीतिक अर्थव्यवस्था में काम करती हैं, जहां अभिजात वर्ग के बीच समझौते और चयनात्मक क्रियान्वयन हावी रहते हैं। ऐसे माहौल में नियमों का पालन अक्सर निष्पक्ष नहीं होता और जवाबदेही कानूनी उल्लंघन के बजाय राजनीतिक समीकरणों पर निर्भर करती है।

भ्रष्टाचार और कमजोर जवाबदेही का असर निवेशकों और ऋणदाताओं द्वारा परियोजनाओं के मूल्यांकन और कीमत निर्धारण में स्पष्ट रूप से दिखाई देता है। पाकिस्तान की कुछ बड़ी परियोजनाओं में लागत वृद्धि, देरी और अनुबंधों में संशोधन की खबरों ने कानूनी ढांचे की स्थिरता पर सवाल खड़े किए हैं। बहुपक्षीय ऋणदाताओं ने भी चेतावनी दी है कि ऐसी अनिश्चितता राज्य के लिए देनदारियां बढ़ाती है और राजकोषीय स्थिरता पर प्रश्नचिह्न लगाती है।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि बार-बार भुगतान संतुलन संकट और आईएमएफ समर्थित स्थिरीकरण कार्यक्रमों से जूझ रहे पाकिस्तान के लिए कानूनी अनिश्चितता उधारी लागत को बढ़ाती है और भविष्य के निवेश को सीमित करती है। अंततः इन बढ़ी हुई लागतों का बोझ आम जनता पर पड़ता है, जिससे सामाजिक विकास के लिए उपलब्ध संसाधन सिमट जाते हैं।

आरिफ ने लिखा कि जब अनौपचारिक व्यवस्थाएं नियम-आधारित शासन की जगह ले लेती हैं, तो बुनियादी ढांचा साझा आर्थिक संपत्ति के बजाय दीर्घकालिक अस्थिरता का स्रोत बन जाता है। इसका नुकसान केवल पाकिस्तान तक सीमित नहीं है; विदेशी साझेदारों को भी परियोजना अनिश्चितता और अनुबंध लागू होने के जोखिम का सामना करना पड़ता है, जिससे दीर्घकालिक सहयोग की संभावनाएं घटती हैं।
 
Similar content Most view View more

Latest Replies

Forum statistics

Threads
16,711
Messages
16,748
Members
20
Latest member
7519202689
Back
Top