नोएडा, 12 फरवरी। नोएडा के सेक्टर-110 स्थित लोटस पनास सोसायटी में उस समय हड़कंप मच गया, जब तृणमूल कांग्रेस सांसद महुआ मोइत्रा और चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर की कथित चैट्स वायरल करने के आरोपी सुरजीत दास गुप्ता के फ्लैट पर नोएडा पुलिस पहुंची।
बताया जा रहा है कि पुलिस कोर्ट से जारी वारंट के आधार पर कार्रवाई करने पहुंची थी। इसी दौरान घटनाक्रम ने नया मोड़ ले लिया। सूत्रों के मुताबिक, जब पुलिस टीम फ्लैट पर पहुंची तो सुरजीत दास ने एक पुलिसकर्मी के मोबाइल पर किसी व्यक्ति से बात करवाई, जिसे उसने एक नेता बताया।
कथित तौर पर उस व्यक्ति ने पुलिस से कहा कि वे कोई कार्रवाई न करें और इंस्ट्रक्शन का इंतजार करें। इसके बाद पुलिस टीम मौके से लौट आई। बाद में पुलिस दस्तावेजों में उल्लेख किया गया कि आरोपी फ्लैट पर मौजूद नहीं मिला। इस पूरे घटनाक्रम से जुड़ा एक वीडियो टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा ने सोशल मीडिया पर साझा किया है, जिससे मामला और गरमा गया है।
यह मामला उस समय और गंभीर हो गया, जब पश्चिम बंगाल के कृष्णनगर से एक पुलिस टीम सोमवार सुबह नोएडा पहुंची।
बंगाल पुलिस का कहना है कि उनके पास सुरजीत दास के खिलाफ गैर-जमानती वारंट था और वे उसे गिरफ्तार करने आए थे। बंगाल पुलिस का दावा है कि उन्होंने आरोपी को ढूंढ लिया था और हिरासत में भी ले लिया था, लेकिन तभी नोएडा पुलिस की 10-15 जवानों की टीम मौके पर पहुंची और गिरफ्तारी की कार्रवाई रोक दी।
बंगाल पुलिस का आरोप है कि स्थानीय पुलिस ने सहयोग नहीं किया, जिसके कारण उन्हें खाली हाथ लौटना पड़ा।
वहीं, नोएडा सेंट्रल पुलिस ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, पश्चिम बंगाल पुलिस ने थाना फेस-2 को विधिवत नॉन-बेलेबल वारंट सौंपा था। आरोपी की लोकेशन सेक्टर-110 स्थित लोटस पनास सोसायटी में बताई गई थी। इसके बाद स्थानीय चौकी प्रभारी सहित पुलिस टीम बंगाल पुलिस के साथ मौके पर पहुंची।
फ्लैट और टावर की जानकारी जुटाई गई और दबिश भी दी गई, लेकिन आरोपी मौके पर नहीं मिला। पुलिस का कहना है कि आरोपी की पत्नी को आवश्यक सूचना दे दी गई। घटना के दौरान सोसायटी में बड़ी संख्या में लोग इकट्ठा हो गए थे, जिसे देखते हुए अतिरिक्त पुलिस बल बुलाया गया।
डीसीपी सेंट्रल नोएडा शक्ति मोहन अवस्थी ने स्पष्ट किया कि स्थानीय पुलिस ने बंगाल पुलिस को पूरा सहयोग दिया है और सहयोग न करने के आरोप निराधार हैं। इस पूरे मामले ने दो राज्यों की पुलिस के बीच समन्वय और राजनीतिक संवेदनशीलता को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
फिलहाल, आरोपी की गिरफ्तारी को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है और मामला राजनीतिक व कानूनी दोनों स्तरों पर चर्चा का विषय बना हुआ है।