शेयर मार्केट का गणित: वीकली-मंथली एक्सपायरी क्या है और इनका अंतर निवेशकों के लिए जानना क्यों है बेहद जरूरी

बाजार की पाठशाला : शेयर मार्केट में वीकली और मंथली एक्सपायरी क्या है, इनमें क्या अंतर होता है? निवेशकों के लिए जानना जरूरी


मुंबई, 12 फरवरी। भारतीय शेयर बाजार तेजी से बदल रहा है। निवेशकों की बढ़ती भागीदारी के साथ-साथ ट्रेडिंग के नए विकल्प और प्रोडक्ट्स भी सामने आ रहे हैं। इन्हीं में से एक महत्वपूर्ण पहलू है फ्यूचर्स और ऑप्शंस (एफएंडओ) कॉन्ट्रैक्ट्स की 'एक्सपायरी'। अक्सर बाजार में सुनने को मिलता है कि आज वीकली एक्सपायरी है या मंथली एक्सपायरी। लेकिन आखिर इसका मतलब क्या है और यह निवेशकों के लिए क्यों जरूरी है?

दरअसल, फ्यूचर्स और ऑप्शंस ऐसे डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट होते हैं जिनकी एक तय समय सीमा होती है। इस तय तारीख को ही एक्सपायरी डेट कहा जाता है। एक्सपायरी के बाद वह कॉन्ट्रैक्ट वैध नहीं रहता। उदाहरण के तौर पर, यदि आपने निफ्टी का कोई ऑप्शन कॉन्ट्रैक्ट खरीदा है जिसकी एक्सपायरी एक निश्चित दिन है, तो उस दिन के बाद वह स्वतः समाप्त हो जाएगा। निवेशक या तो एक्सपायरी से पहले अपनी पोजीशन बंद कर सकते हैं या फिर एक्सपायरी के दिन उसका सेटलमेंट होता है।

शुरुआत में भारतीय बाजार में केवल मंथली एक्सपायरी होती थी। यानी हर महीने के आखिरी गुरुवार को सभी एफएंडओ कॉन्ट्रैक्ट्स समाप्त हो जाते थे। इससे निवेशकों को लंबी अवधि की रणनीति बनाने का समय मिलता था। हालांकि, बढ़ती ट्रेडिंग गतिविधियों और निवेशकों की मांग को देखते हुए वीकली एक्सपायरी की शुरुआत की गई। वर्ष 2016 में एनएसई ने सबसे पहले बैंक निफ्टी में वीकली ऑप्शंस लॉन्च किए, जिसके बाद निफ्टी और कुछ अन्य स्टॉक्स में भी यह सुविधा शुरू हुई।

वीकली एक्सपायरी का मतलब है कि हर सप्ताह एक तय दिन कॉन्ट्रैक्ट्स समाप्त होंगे। पहले यह दिन आमतौर पर गुरुवार होता था। हालांकि, कुछ समय पहले एक बड़े बदलाव के तहत एनएसई ने सभी एफएंडओ कॉन्ट्रैक्ट्स की एक्सपायरी गुरुवार से बदलकर मंगलवार कर दी है। ऐसे में अब सभी कॉन्ट्रैक्ट्स की एक्सपायरी मंगलवार को हो गई है।

वीकली और मंथली एक्सपायरी में कई महत्वपूर्ण अंतर हैं। वीकली एक्सपायरी कम समय की होती है, इसलिए इसमें वोलैटिलिटी (अस्थिरता) यानी उतार-चढ़ाव अधिक देखने को मिलता है। यह शॉर्ट-टर्म ट्रेडर्स के लिए अवसर पैदा करती है, जो तेजी से मुनाफा कमाने की रणनीति अपनाते हैं। दूसरी ओर, मंथली एक्सपायरी अपेक्षाकृत स्थिर होती है और लंबी अवधि की पोजीशन लेने वाले निवेशकों के लिए अधिक उपयुक्त मानी जाती है। दोनों ही प्रकार के कॉन्ट्रैक्ट्स में निफ्टी और बैंक निफ्टी जैसे इंडेक्स में अच्छी लिक्विडिटी उपलब्ध रहती है।

बाजार के जानकारों का कहना है कि एक्सपायरी का दिन बाजार में खास महत्व रखता है क्योंकि इस दिन अक्सर भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिलता है। यह उतार-चढ़ाव ट्रेडर्स के लिए अवसर भी बन सकता है और जोखिम भी। बड़े निवेशक और संस्थान अपने पोर्टफोलियो को बाजार जोखिम से बचाने के लिए फ्यूचर्स और ऑप्शंस का इस्तेमाल हेजिंग के तौर पर करते हैं। ऐसे में वीकली और मंथली दोनों एक्सपायरी रणनीति का अहम हिस्सा होती हैं।

एक्सपर्ट्स के मुताबिक, रिटेल निवेशकों के लिए यह समझना जरूरी है कि एक्सपायरी के दौरान बाजार में तेजी से बदलाव हो सकता है। बिना समझे ट्रेडिंग करने पर नुकसान की संभावना बढ़ जाती है। इसलिए नए निवेशकों को सलाह दी जाती है कि वे पहले एक्सपायरी की प्रकृति, जोखिम और रणनीतियों को समझें, फिर सीमित पूंजी के साथ अभ्यास करें।
 

Similar threads

Latest Replies

Trending Content

Forum statistics

Threads
6,231
Messages
6,263
Members
18
Latest member
neodermatologist
Back
Top