कूटनीतिक शक्ति के लिए तकनीक का सहारा! भारत AI, रेयर अर्थ में छलांग लगाकर बनेगा वैश्विक नेता

'कूटनीतिक ताकत बढ़ाने के लिए भारत को तकनीक में बड़ी छलांग लगानी होगी'


नई दिल्ली, 12 फरवरी। एक लेख के अनुसार, भारत को कूटनीतिक स्तर पर अपनी ताकत (दूसरे देशों पर प्रभाव) बढ़ाने के लिए नई और उन्नत तकनीकों में बड़ी प्रगति करनी होगी। खास तौर पर दुर्लभ खनिज (रेयर अर्थ) प्रोसेसिंग, उन्नत दवाओं, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और सस्ती सैटेलाइट लॉन्च सेवाओं जैसे क्षेत्रों में अमेरिकी मॉडल से सीख लेते हुए भारत को अपनी रणनीति तैयार करनी चाहिए। इससे भारत ऐसी रणनीतिक निर्भरता पैदा कर सकेगा, जिसका इस्तेमाल वह अंतरराष्ट्रीय संबंधों में अपने हितों के लिए कर सकता है।

'इंडिया नैरेटिव' में प्रकाशित लेख में कहा गया है कि रक्षा और आईटी जैसे उन्नत तकनीकी क्षेत्रों में अमेरिका की पकड़ और उसकी मजबूत वित्तीय व्यवस्था ने उसे वैश्विक कूटनीति में प्रभावशाली बनाया है। इसी ताकत के दम पर अमेरिका अन्य देशों के साथ अपने हितों के अनुसार संबंधों को संचालित कर पाता है।

श्रिजीत फडके द्वारा लिखे गए इस लेख में कहा गया है कि अमेरिका की सफलता का कारण यह है कि उसने ऐसे क्षेत्रों में पकड़ बनाई, जहां दुनिया उसके बिना काम नहीं कर सकती। भारत को भी बिना अपने मूल्यों से समझौता किए लगातार नवाचार करना होगा, साझा लक्ष्यों की दिशा में समन्वित प्रयास करने होंगे और ऐसी क्षमताएं विकसित करनी होंगी, जिन पर दुनिया निर्भर हो जाए।

लेख में सुझाव दिया गया है कि भारत को कुछ खास क्षेत्रों पर ध्यान देना चाहिए, जैसे रेयर अर्थ प्रोसेसिंग, सस्ती दवाएं और उन्नत बायोलॉजिक्स, उभरते देशों के लिए ओपन-सोर्स एआई, सस्ती सैटेलाइट और लॉन्च सेवाएं और डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (जैसे यूपीआई को दुनिया में फैलाना)। अगर दुनिया भारत की इन सेवाओं पर निर्भर होगी, तो भारत अपनी कूटनीतिक ताकत बढ़ा सकेगा।

लेख में कहा गया है कि अंतरराष्ट्रीय संबंधों में केवल सद्भावना से प्रभाव नहीं बनाया जा सकता। अमेरिका ने समय-समय पर टैरिफ, आर्थिक प्रतिबंध, तकनीकी मानक, वित्तीय प्रणाली और सांस्कृतिक प्रभाव जैसे कई साधनों का इस्तेमाल कर अपने हित साधे हैं। असली ताकत उसी के पास होती है, जिसके पास ऐसी विशेष क्षमता हो जिसका विकल्प आसानी से उपलब्ध न हो।

साथ ही लेख में यह भी कहा गया है कि भारत को अमेरिका की नकल नहीं करनी चाहिए, बल्कि उसके मूल सिद्धांत को अपने तरीके से अपनाना चाहिए। भारत को चुनिंदा क्षेत्रों, तकनीकों और सेवाओं को इतना महत्वपूर्ण बनाना होगा कि वे दुनिया के लिए अनिवार्य (जरूरी) हो जाएं।

लेख में सुझाव दिया गया है कि भारत को आईटी, सॉफ्टवेयर, एआई, फिनटेक और बायोटेक जैसे उच्च मूल्य वाले सेवा क्षेत्रों में तेजी से विस्तार करना चाहिए। साथ ही इलेक्ट्रॉनिक्स, नवीकरणीय ऊर्जा और रक्षा उत्पादन में भी मजबूती बनाए रखनी चाहिए। एआई, क्वांटम सुरक्षा तकनीक और ग्रीन हाइड्रोजन जैसे नए क्षेत्रों में वैश्विक बाजार हिस्सेदारी बढ़ाने पर जोर दिया गया है।

इसके अलावा, लेख में शिक्षा और शोध प्रणाली में बड़े सुधार की जरूरत पर जोर दिया गया है। पाठ्यक्रम में रटने की बजाय गहन और मौलिक शोध को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। नए और साहसिक विचारों को प्रोत्साहन दिया जाए, जो वैश्विक स्तर पर एकाधिकार जैसी स्थिति बना सकें। 'सच्चे नवाचार' के लिए राष्ट्रीय स्तर पर कड़े मानक तय किए जाने चाहिए, ताकि ऐसे परिणाम सामने आएं जो देश को रणनीतिक बढ़त दिला सकें।
 
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